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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 207

Power to issue summons or warrant for offence committed beyond local jurisdiction

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान क्षेत्राधिकार की कमी को पाटता है: कभी-कभी व्यक्ति एक मजिस्ट्रेट के क्षेत्र में रहता है पर अपराध कहीं और—विदेश में भी—घटित होता है, और कोई विद्यमान नियम स्पष्ट नहीं बताता कि मामला किस न्यायालय में जाएगा। ऐसे प्रावधान के बिना ‘विचारण स्थान’ से जुड़ी प्रक्रियागत पेचीदगियाँ मात्र भौगोलिक कारणों से अपराधियों को सजा से बचा सकती थीं। यह स्थानीय मजिस्ट्रेट को अंतरिम रूप से कार्यवाही करने—व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित करने—के साथ-साथ मामले को उस मजिस्ट्रेट की ओर निर्देशित करने की अनुमति देकर दंड प्रक्रिया की निरंतरता सुनिश्चित करता है जो वास्तव में विचारण का विधिक अधिकार रखता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा किसी भी मजिस्ट्रेट को कहीं भी किए गए किसी भी अपराध का विचारण करने का अधिकार नहीं देती।

    तथ्य: यह केवल मजिस्ट्रेट को प्रारंभिक पूछताछ करने और अभियुक्त की उपस्थिति अंतरिम रूप से सुनिश्चित करने की अनुमति देती है—वास्तविक विचारण उसी मजिस्ट्रेट के समक्ष होना चाहिए जिसके पास विधिवत क्षेत्राधिकार है।

  • मिथक: इस धारा के अंतर्गत हर मामले में जमानत स्वतः उपलब्ध नहीं होती।

    तथ्य: जमानत तभी दी जा सकती है जब अपराध मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय न हो, और अभियुक्त उसे देने के लिए तैयार हो।