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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 202

Offences committed by means of electronic communications, letters, etc

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

परंपरागत आपराधिक प्रक्रिया यह मानकर चलती थी कि अपराध एक भौतिक स्थान पर होता है, जिससे क्षेत्राधिकार तय करना सरल रहता था। लेकिन फ़ोन, ईमेल और ऑनलाइन संदेशों के जरिए होने वाली धोखेबाज़ी अक्सर कई शहरों या राज्यों में फैली होती है, और द्विविवाह के मामलों में अलगाव के बाद पति-पत्नी प्रायः अलग-अलग स्थानों पर रहते हैं। यह प्रावधान (पूर्व दंड प्रक्रिया संहिता के नियम को आगे बढ़ाते हुए) पीड़ितों को यह लचीलापन देता है कि वे अपने लिए सुविधाजनक स्थान पर मामला दायर कर सकें, न कि केवल अभियुक्त के ठिकाने का पीछा करने के लिए बाध्य हों।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

भारतीय न्यायालयों ने पुरानी दंप्रसं (CrPC) की पूर्ववर्ती धारा 182 की व्याख्या करते हुए कहा है कि डिजिटल संचार से जुड़ी धोखेबाज़ी में क्षेत्राधिकार उस स्थान पर भी हो सकता है जहाँ भ्रामक संदेश भेजा गया था या जहाँ वह प्राप्त हुआ—इससे पीड़ित को विकल्प मिलता है। न्यायालयों ने यह भी स्पष्ट किया है कि द्विविवाह के मामलों में पहली शादी वाली पत्नी उस स्थान पर शिकायत दर्ज कर सकती है जहाँ वह विवाह टूटने के बाद पुनर्वासित होकर बस गई है, क्योंकि ऐसे अपराधों के बाद स्थानांतरित हुई महिलाओं की व्यावहारिक कठिनाइयों को मान्यता दी गई है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: ऑनलाइन संदेशों के जरिए हुई धोखेबाज़ी का मामला केवल उसी स्थान पर दायर किया जा सकता है जहाँ ठग शारीरिक रूप से मौजूद हो।

    तथ्य: कानून यह अनुमति देता है कि मामला या तो जहाँ से संदेश भेजा गया वहाँ दायर हो, या जहाँ संदेश प्राप्त हुआ वहाँ—इससे पीड़ित के पास अधिक विकल्प होते हैं।

  • मिथक: द्विविवाह का मामला केवल उसी स्थान पर दायर किया जा सकता है जहाँ दूसरी शादी हुई थी।

    तथ्य: मामला वहाँ भी दायर किया जा सकता है जहाँ दंपति आख़िरी बार साथ रहे थे, या जहाँ पहली पत्नी बाद में स्थायी रूप से बस गई है।