Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 203
Offence committed on journey or voyage
When an offence is committed whilst the person by or against whom, or the thing in respect of which, the offence is committed is in the course of performing a journey or voyage, the offence may be inquired into or tried by a Court through or into whose local jurisdiction that person or thing passed in the course of that journey or voyage.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यात्रा के दौरान किए गए अपराध—खासकर वे जो कई ज़िलों या राज्यों से होकर जाने वाली ट्रेनों, बसों या जहाज़ों पर होते हैं—में अधिकार-क्षेत्र को लेकर उलझन होती है, क्योंकि अपराध का ठीक-ठीक स्थान तय करना कठिन पड़ सकता है। यह प्रावधान (पूर्व दण्ड प्रक्रिया संहिता के एक नियम को आगे बढ़ाते हुए) सुनिश्चित करता है कि यात्रा मार्ग के किसी भी हिस्से से संबद्ध न्यायालय मामला संभाल सके, ताकि पीड़ित और पुलिस अधिकार-क्षेत्र की बहस में न उलझें और सुराग ठंडा न पड़ जाए।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतों ने ऐतिहासिक रूप से पूर्ववर्ती प्रावधान (Section 182 CrPC) को चलती ट्रेनों में चोरी या मारपीट जैसे मामलों में लागू किया है, यह मानते हुए कि अधिकार-क्षेत्र उस किसी भी न्यायालय तक फैलता है जिससे होकर ट्रेन गुज़री, न कि केवल प्रस्थान या आगमन के स्थान तक। यह लचीला दृष्टिकोण लगातार बरक़रार रखा गया है ताकि मात्र इस वजह से अभियुक्त मुकदमे से न बच निकलें कि लंबी यात्रा में अपराध का सटीक बिंदु तय नहीं हो पाया।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: मामले की सुनवाई केवल वहीं हो सकती है जहाँ से यात्रा शुरू हुई या जहाँ समाप्त हुई।
तथ्य: जिस पूरे मार्ग से व्यक्ति या वस्तु गुज़री, उस रास्ते के किसी भी न्यायालय में जाँच या विचारण किया जा सकता है।
मिथक: अधिकार-क्षेत्र स्थापित करने के लिए आपको अपराध का सटीक स्थान साबित करना अनिवार्य है।
तथ्य: यह प्रावधान ठीक इसलिए है कि सटीक स्थान अज्ञात हो सकता है; यात्रा-पथ पर आने वाला कोई भी न्यायालय अधिकार-क्षेत्र रखता है।