Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 204
Place of trial for offences triable together
Where—
(a) the offences committed by any person are such that he may be charged with, and tried at one trial for, each such offence by virtue of the provisions of section 242, section 243 or section 244; or
(b) the offence or offences committed by several persons are such that they may be charged with and tried together by virtue of the provisions of section 246, the offences may be inquired into or tried by any Court competent to inquire into or try any of the offences.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह व्यवस्था भारतीय दंड प्रक्रिया में लंबे समय से चली आ रही उस सिद्धांत को आगे बढ़ाती है (जो पहले दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 में था) जिसका उद्देश्य संबंधित अपराधों या सह‑अभियुक्तों को विधिवत् जोड़े जाने पर बहु‑मुकदमों और परस्पर-विरोधी निर्णयों से बचना है। इससे समय की बचत होती है, गवाहों और अभियुक्तों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलती है, और मामलों को अलग‑अलग न्यायालयों में बाँटने के बजाय एक सक्षम न्यायालय में सभी जुड़े अपराधों की सुनवाई कर न्यायिक कार्यकुशलता बढ़ती है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: धारा 204 किसी भी अदालत को अधिकार‑क्षेत्र की परवाह किए बिना किसी भी अपराध की सुनवाई करने देती है।
तथ्य: यह केवल तभी लागू होती है जब अपराध पहले से ही विशिष्ट संयुक्त‑विचारण नियमों (धारा 242, 243, 244 या 246) के तहत विधिवत् रूप से जोड़े जा सकते हों; यह सामान्य रूप से अधिकार‑क्षेत्र के नियमों को निरस्त नहीं करती।
मिथक: यह धारा एक नए प्रकार का न्यायालय बनाती है।
तथ्य: यह नए न्यायालय स्थापित नहीं करती—यह केवल इतना कहती है कि जो न्यायालय पहले से सक्षम है (कम से कम किसी एक अपराध के लिए सक्षम), वह एक साथ जोड़े गए अपराधों की संयुक्त रूप से सुनवाई कर सकता है।