Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 199
Offence triable where act is done or consequence ensues
When an act is an offence by reason of anything which has been done and of a consequence which has ensued, the offence may be inquired into or tried by a Court within whose local jurisdiction such thing has been done or such consequence has ensued.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
कई अपराध ‘परिणाम-अपराध’ होते हैं — जिनमें गलत कृत्य और उसका हानिकारक असर अलग-अलग स्थानों पर हो सकते हैं, खासकर विषप्रयोग, डाक से ठगी, प्रकाशन के ज़रिये मानहानि, या ऑनलाइन धोखाधड़ी में। पुराने दंड प्रक्रिया संहिताओं में यह उलझन रहती थी कि जब कृत्य और परिणाम भौगोलिक रूप से अलग हों तो किस न्यायालय का अधिकार क्षेत्र बनेगा। इस प्रावधान ने (Code of Criminal Procedure, 1973 की Section 179 से आगे बढ़कर Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 में समाहित) यह समस्या सुलझाई है: दोनों स्थानों के न्यायालयों को अधिकार देकर, ताकि अभियुक्त सिर्फ इसलिए मुकदमे से न बच सके कि कृत्य और परिणाम अलग-अलग ज़िलों या राज्यों में हुए।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
पिछले प्रावधान (Section 179 CrPC) के अंतर्गत, न्यायालयों ने माना है कि जब ठगी जैसे अपराध में कृत्य एक नगर में हो, पर उसका हानिकारक परिणाम — जैसे धन या संपत्ति की हानि — दूसरे नगर में महसूस हो, तो पीड़ित वहाँ मामला दर्ज कर सकता है जहाँ परिणाम हुआ, भले ही अभियुक्त ने कहीं और से कार्य किया हो। न्यायालयों ने इस तर्क का उपयोग इसलिए किया कि अपराधी केवल दूरस्थ स्थान से काम करके, जबकि हानि किसी अन्य क्षेत्राधिकार में स्पष्ट रूप से पड़ रही हो, खुद को कानूनी कार्रवाई से न बचा सकें।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: मामले की सुनवाई केवल उसी स्थान पर हो सकती है जहाँ अपराधी ने शारीरिक रूप से कृत्य किया था।
तथ्य: कानून यह अनुमति देता है कि सुनवाई या तो वहाँ हो जहाँ कृत्य हुआ या वहाँ जहाँ उसका परिणाम (हानि) हुआ — जो भी उपयुक्त या सुविधाजनक हो।
मिथक: यह प्रावधान किसी नए प्रकार के अपराध का सृजन करता है।
तथ्य: यह किसी अपराध को परिभाषित नहीं करता; यह केवल यह तय करता है कि जब कृत्य और उसका परिणाम अलग-अलग स्थानों पर हों तो किस अदालत के पास उस मामले की सुनवाई का अधिकार होगा।