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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 506

Irregularities which do not vitiate proceedings

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

मजिस्ट्रेट के अधिकार में हर तकनीकी त्रुटि किसी अन्यथा न्यायसंगत कार्यवाही को उलट नहीं देनी चाहिए, खासकर जब भूल ईमानदारी से और बिना किसी दूषित आशय के हुई हो। यह प्रावधान नियमित न्यायिक कृत्यों की अंतिमता को मात्र क्षेत्राधिकार संबंधी तकनीकी आपत्तियों से निरस्त होने से बचाता है, और छोटी अनियमितताओं को उन गंभीर दोषों से अलग करता है जिनका उल्लेख अगली धारा में पृथक रूप से है। इसका साम्य पूर्व दंप्रसं के धारा 460 से है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

समकक्ष दंप्रसं प्रावधान को लागू करते हुए न्यायालयों ने सामान्यतः माना है कि ऐसी अनियमितताएँ सुधारी जा सकती हैं, क्योंकि वे मजिस्ट्रेट की शक्तियों की परिधि से संबंधित हैं, न कि विषय-वस्तु पर पूर्ण क्षेत्राधिकार के अभाव से; बशर्ते मजिस्ट्रेट ने ईमानदारी से कार्य किया हो।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: किसी अनधिकृत मजिस्ट्रेट द्वारा किया गया हर कार्य स्वतः अमान्य होता है।

    तथ्य: इस धारा में दिए गए विशिष्ट कार्यों के संदर्भ में, प्राधिकार के बारे में सद्भावना-आधारित ईमानदार भूल मात्र से कार्यवाही अमान्य नहीं होती; जिन कार्यों से कार्यवाही निरस्त होती है, वे अलग धारा में आवृत हैं।