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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 129

Security for good behaviour from habitual offenders

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान उपनिवेश-कालीन दंड प्रक्रिया संहिता की दीर्घकालिक निवारक-न्याय परंपरा (मूल रूप से धारा 110 CrPC) को आगे बढ़ाता है। यह मजिस्ट्रेट को यह सामर्थ्य देता है कि वह आदतन अपराधी से अगले अपराध के होने से पहले ही अच्छे आचरण का बंधपत्र लेने की मांग करे, बजाय इसके कि किसी नए अपराध के होने की प्रतीक्षा करे। इसका उद्देश्य किसी विशिष्ट सिद्ध अपराध के दंड की जगह, निवारण और निगरानी के जरिए समुदाय की रक्षा करना है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

पुरानी धारा 110 CrPC (अब धारा 129 BNSS) के अंतर्गत न्यायालयों ने बार-बार जोर दिया है कि यह दंडात्मक नहीं बल्कि निवारक उपाय है, और इसे सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि यह किसी विशिष्ट दोषसिद्धि के बजाय सामान्य प्रतिष्ठा (‘आदतन’ आचरण) के आधार पर स्वतंत्रता को सीमित कर सकता है। न्यायाधीशों ने माना है कि मात्र संदेह या एक अकेली घटना पर्याप्त नहीं है — विश्वसनीय सामग्री से आदतन आचरण का प्रतिरूप दिखना चाहिए, और किसी भी बंधपत्र की मांग से पहले विधि द्वारा अपेक्षित उचित प्रक्रिया (न्यायोचित रूप से उत्तर देने का अवसर) का पालन होना चाहिए।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा किसी अपराध में दोष सिद्ध कर दंड देने के लिए प्रयोग की जाती है।

    तथ्य: यह एक निवारक उपाय है, दोषसिद्धि नहीं — इसमें किसी विशिष्ट सिद्ध अपराध के दंड के बजाय अच्छे आचरण का बंधपत्र मांगा जाता है।

  • मिथक: एक अकेली घटना इस धारा को लागू करने के लिए पर्याप्त है।

    तथ्य: अदालतें इस प्रावधान के उपयोग से पहले ‘आदतन’ आचरण का पैटर्न चाहती हैं, केवल एक अलग-थलग कृत्य नहीं।

  • मिथक: व्यक्ति को अपने बचाव का कोई मौका नहीं मिलता।

    तथ्य: कानून स्पष्ट रूप से अपेक्षा करता है कि बंधपत्र लगाने से पहले मजिस्ट्रेट व्यक्ति को ‘कारण बताने’ — यानी उत्तर देने और समझाने — का अवसर दे।