Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 128
Security for good behaviour from suspected persons
When an Executive Magistrate receives information that there is within his local jurisdiction a person taking precautions to conceal his presence and that there is reason to believe that he is doing so with a view to committing a cognizable offence, the Magistrate may, in the manner hereinafter provided, require such person to show cause why he should not be ordered to execute a bond or bail bond for his good behaviour for such period, not exceeding one year, as the Magistrate thinks fit.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह उपबंध निवारक न्याय का एक औजार है, जो पुराने दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 108 से आगे बढ़ाया गया है, और उपनिवेशकालीन पुलिसिंग कानून की उस सोच पर आधारित है जिसमें प्राधिकारियों को अपराध होने से पहले ही कदम उठाने की अनुमति दी जाती थी, न कि केवल बाद में। विचार यह है कि जो लोग संदिग्ध परिस्थितियों में अपनी पहचान या ठिकाना छिपाते हैं, वे अपराध की तैयारी में हो सकते हैं; ऐसे में सुरक्षा-बॉन्ड की मांग एक निरोधक और समयपूर्व चेतावनी तंत्र की तरह काम करती है, बिना वास्तविक अपराध की प्रतीक्षा किए।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतों ने लगातार माना है कि ऐसे निवारक-सुरक्षा प्रावधानों का उपयोग सावधानी से होना चाहिए और ये साधारण आपराधिक अभियोजन के स्थानापन्न नहीं हैं। न्यायाधीशों ने बल दिया है कि केवल संदेह या अस्पष्ट सूचना पर्याप्त नहीं—छिपकर रहने और किसी संज्ञेय अपराध करने के इरादे का विश्वसनीय, ठोस और विशिष्ट आधार होना चाहिए, क्योंकि ये शक्तियाँ बिना मुकदमे के निजी स्वतंत्रता पर आंच डालती हैं। अदालतों ने खोखली या सामान्यीकृत पुलिस रिपोर्टों के आधार पर शुरू की गई कार्यवाहियों को रद्द किया है जिनमें वास्तविक सामग्री का अभाव था।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: इसका मतलब यह नहीं है कि जो भी मिलनसार न हो या चुपचाप रहता हो उसे गिरफ़्तार किया जा सकता है।
तथ्य: कानून केवल निजी स्वभाव पर नहीं टिकता—यह आवश्यक है कि छिपकर रहने का उद्देश्य किसी विशिष्ट संज्ञेय गंभीर अपराध को करना है, इस बारे में वास्तविक और तर्कसंगत विश्वास हो; सिर्फ संदेहास्पद जीवनशैली काफी नहीं।
मिथक: बंधपत्र पर हस्ताक्षर करना इसका प्रमाण है कि व्यक्ति अपराधी है।
तथ्य: यह एक निवारक उपाय है, सजा नहीं—यहाँ न कोई अपराध सिद्ध हुआ है और न आवश्यक रूप से प्रयत्न ही; बात केवल आगे के अच्छे आचरण का आश्वासन लेने की है।