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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 353

Accused person to be competent witness

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान आरोपी के मौन रहने के अधिकार की रक्षा करता है, साथ ही यदि वह चाहे तो अपनी रक्षा में गवाही देने का विकल्प भी देता है। यह उस सिद्धांत को दर्शाता है कि प्रमाणभार अभियोजन पर होता है, और आरोपी का गवाही न देने का निर्णय कभी भी दोषस्वीकारोक्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

समतुल्य पूर्ववर्ती प्रावधान की न्यायालयीय व्याख्या में निरंतर माना गया है कि आरोपी के गवाही न देने से उसके विरुद्ध प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता; इससे निर्दोषता के अनुमान का सिद्धांत और यह सिद्धांत पुष्ट होता है कि दोष सिद्ध करना अभियोजन का दायित्व है, न कि आरोपी का निर्दोष होना सिद्ध करना।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यदि कोई आरोपी गवाही नहीं देता, तो इसका अर्थ है कि वह अवश्य ही दोषी है।

    तथ्य: कानून स्पष्ट रूप से निषिद्ध करता है कि आरोपी की चुप्पी या साक्ष्य न देने के उसके निर्णय को किसी भी प्रकार से दोष के प्रमाण के रूप में माना जाए, और यह भी निषिद्ध करता है कि इस पर पक्षकार या न्यायालय कोई टिप्पणी करें।