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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 101

Power to compel restoration of abducted females

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान एक लंबे समय से विद्यमान सुरक्षा उपाय (पहले दण्ड प्रक्रिया संहिता में निहित) की निरंतरता है, जिसका उद्देश्य स्त्रियों और बालिकाओं को अपहरण, जबरन बंदीकरण, मानव तस्करी, या उनकी इच्छा के विरुद्ध शोषण हेतु रोके रखने से बचाना है। चूंकि ऐसी स्थितियाँ तात्कालिक और खतरनाक हो सकती हैं, कानून मजिस्ट्रेटों को शपथयुक्त शिकायत मिलते ही — पूर्ण मुकदमे की प्रतीक्षा किए बिना — तुरंत और सीधे हस्तक्षेप करने का त्वरित मार्ग देता है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने सामान्यतः माना है कि यह शक्ति आपातकालीन, संरक्षणात्मक कार्रवाई के लिए है, न कि अपहरण के आरोप पर पूर्ण मुकदमे के स्थानापन्न के रूप में; पुनर्स्थापन का आदेश देने से पहले मजिस्ट्रेट को यह संतोष होना चाहिए कि अवैध निरुद्धि या अपहरण का वास्तविक मामला है, और आदेश का उद्देश्य स्त्री या बालिका की सुरक्षा एवं स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है, न कि अभिरक्षा या संपत्ति विवादों का निपटारा करना।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह प्रावधान यह तय करता है कि अपहरण का दोषी कौन है।

    तथ्य: यह केवल स्त्री या बालिका को शीघ्र मुक्त कराने की कार्रवाई की अनुमति देता है; अपहरण का दोष या दंड अलग से पूर्ण आपराधिक मुकदमे के माध्यम से तय होता है।

  • मिथक: कोई भी शिकायत, चाहे अनौपचारिक ही क्यों न हो, इस शक्ति को सक्रिय कर देती है।

    तथ्य: शिकायत शपथ पर (शपथयुक्त बयान के रूप में) दी जानी चाहिए; केवल साधारण सूचना या अफ़वाह पर्याप्त नहीं है।