Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 354
No influence to be used to induce disclosure
Except as provided in sections 343 and 344, no influence, by means of any promise or threat or otherwise, shall be used to an accused person to induce him to disclose or withhold any matter within his knowledge.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह उपबंध आरोपी द्वारा की जाने वाली किसी भी खुलासे की स्वैच्छिकता की रक्षा करता है और ऐसे किसी भी दबावकारी तौर-तरीके—चाहे प्रलोभन हों या डराना-धमकाना—को रोकता है जो अविश्वसनीय या अनुचित कबूलनामे पैदा कर सकते हैं। यह आपराधिक जांच और मुकदमों में अनुचित दबाव की तरकीबों के विरुद्ध एक सुरक्षा है, जो विधिक प्रक्रिया (due process) की रक्षा करती है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतें लंबे समय से प्रलोभन, धमकी या वादे के जरिए प्राप्त कबूलनामों या खुलासों को अविश्वसनीय और विधिक रूप से संदिग्ध मानती आई हैं, और ऐसे उपबंध को व्यापक साक्ष्य-नियमों से निकटता से जोड़ती हैं, जिनके अनुसार बलपूर्वक या झूठे आश्वासनों से निकाले गए कबूलनामों को आरोपी के विरुद्ध प्रयोग से बाहर रखा जाता है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: गलत: पुलिस संदिग्ध को बात कराने के लिए नरमी का वादा कर सकती है, बशर्ते वह काम कर जाए। (कानून ऐसा करने की अनुमति नहीं देता।)
तथ्य: यह धारा विशेष रूप से वादों, धमकियों या किसी अन्य प्रकार के दबाव का प्रयोग कर खुलासा करवाने या चुप करवाने पर रोक लगाती है, सिवाय उन निर्दिष्ट उपबंधों के तहत औपचारिक क्षमा-प्रक्रिया के माध्यम से।