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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 67

Procedure when service cannot be effected as before provided

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान इसलिए है कि केवल इस कारण से कार्यवाही ठप न पड़ जाए कि व्यक्ति शारीरिक रूप से मिल नहीं रहा या समन लेने से इंकार कर रहा है। भारतीय वैधानिक प्रक्रिया ने लंबे समय से माना है कि केवल हाथों-हाथ सेवा की अनिवार्यता से बचने वाले पक्ष न्याय से बच निकलेंगे। इसलिए ‘प्रतिस्थापित सेवा’ (substituted service) — अर्थात व्यक्ति के निवास-स्थान पर समन को स्पष्ट रूप से चिपकाना — को अंतिम उपाय के रूप में स्वीकार किया गया है, पर केवल तब जब वास्तविक प्रयास विफल हो जाएं, और दुरुपयोग रोकने के लिए न्यायालय की देखरेख के साथ।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने लगातार माना है कि ‘यथोचित सतर्कता’ (due diligence) एक वास्तविक तथ्यात्मक कसौटी है, जिसे समन चिपकाने का सहारा लेने से पहले सच्चाई से पूरा किया जाना चाहिए — सिर्फ औपचारिक कोशिशें पर्याप्त नहीं हैं। एक जैसे पूर्ववर्ती प्रावधान के अंतर्गत आए फैसलों (Section 106 CrPC तथा इससे पहले Section 84) ने जोर दिया कि चिपकाकर सेवा एक अपवाद है, सामान्य शॉर्टकट नहीं; और सेवा को वैध घोषित करने से पहले न्यायालय को महज़ प्रेषण-अधिकारी की रिपोर्ट को यांत्रिक रूप से स्वीकार करने के बजाय स्वतंत्र रूप से अपना मस्तिष्क लगाना चाहिए।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: अधिकारी पहली ही बार घर पर व्यक्ति न मिलने पर तुरंत दरवाज़े पर समन चिपका सकते हैं।

    तथ्य: क़ानून वास्तविक ‘यथोचित सतर्कता’ (due diligence) — व्यक्ति या उसके प्रतिनिधि को तामील के लिए सच्चे, बार-बार किए गए प्रयास — की माँग करता है, और तभी समन चिपकाने का सहारा लिया जा सकता है।

  • मिथक: एक बार समन चिपका दिया जाए, तो वह अपने-आप वैध हो जाता है।

    तथ्य: न्यायालय को स्वतंत्र रूप से जाँचकर यह तय करना होता है कि इसे विधिवत तामील माना जाए या नई तामील का आदेश दिया जाए।