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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 64

Summons how served

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

दंड प्रक्रिया में हमेशा यह अपेक्षा रही है कि किसी को अदालत में हाज़िर होने की सूचना देने का विश्वसनीय और प्रमाणित तरीका हो—चाहे मुकदमे के लिए, गवाह के रूप में, या दस्तावेज़ प्रस्तुत करने हेतु। पुराने दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (Section 62) ने व्यक्तिगत सेवा को सामान्य नियम माना था। BNSS, 2023 ने इसी ढाँचे को बरकरार रखते हुए इसे आधुनिक बनाया है—समनों की इलेक्ट्रॉनिक सेवा को स्पष्ट रूप से मान्यता देकर (ईमेल, संदेश और डिजिटल संचार को वैध माध्यम मानते हुए) और संपर्क विवरण के रजिस्टर अनिवार्य करके—जो न्यायालयी प्रशासन के डिजिटलीकरण और तेज तथा अधिक निगरानीयोग्य संचार की दिशा में बदलाव को दर्शाता है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

समतुल्य CrPC प्रावधान के अंतर्गत, न्यायालयों ने लगातार माना कि व्यक्तिगत सेवा ही वरीय तरीका है, और प्रतिस्थापित/वैकल्पिक तरीके (जैसे निवास पर चस्पा करना) तभी स्वीकार्य हैं जब व्यक्तिगत सेवा व्यावहारिक न हो—और वैकल्पिक उपाय अपनाने से पहले वास्तविक प्रयास हुए या नहीं, इसे न्यायालय परखते रहे। हस्ताक्षरित प्राप्ति-रसीद को भी वैध सेवा के महत्त्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में माना गया, विशेषकर जब बाद में कोई व्यक्ति दावा करे कि उसे समन मिला ही नहीं। चूँकि BNSS नया है, इलेक्ट्रॉनिक सेवा संबंधी विशिष्ट उपबंध की न्यायिक व्याख्या अभी विकसित हो रही है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: समन केवल पुलिस अधिकारी ही दे सकता है।

    तथ्य: कानून यह भी अनुमति देता है कि यदि राज्य के नियम अनुमति दें, तो न्यायालय के अधिकारी या अन्य लोक सेवक भी समन की तामील कर सकते हैं; केवल पुलिस तक ही सीमित नहीं है।

  • मिथक: इलेक्ट्रॉनिक समन (जैसे ईमेल) की कोई कानूनी वैधता नहीं है।

    तथ्य: उपधारा (2) के उपबन्ध में स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि न्यायालय की मुहर की छवि युक्त समन को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक रूप से भी तामील किया जा सकता है।

  • मिथक: समन प्राप्त करते समय आपको हमेशा रसीद पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है।

    तथ्य: हस्ताक्षर तभी आवश्यक हैं जब समन देने वाला अधिकारी ऐसा करने को कहे; हर मामले में यह स्वतः अनिवार्य नहीं है।