Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 63
Form of summons
Every summons issued by a Court under this Sanhita shall be,—
(i) in writing, in duplicate, signed by the presiding officer of such Court or by such other officer as the High Court may, from time to time, by rule direct, and shall bear the seal of the Court; or
(ii) in an encrypted or any other form of electronic communication and shall bear the image of the seal of the Court or digital signature.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
समन वह आधिकारिक आदेश है जो किसी व्यक्ति को अदालत में उपस्थित होने या कुछ प्रस्तुत करने को कहता है; यदि नकली या अप्रमाणित समन फैलें, तो लोग ठगे या परेशान किए जा सकते हैं। ऐतिहासिक रूप से भारतीय दंड प्रक्रिया (Code of Criminal Procedure, 1898 और 1973 तक जाती हुई) ने प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए लिखित, हस्ताक्षरित, मुहर-बंद समन की मांग की। Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 ने इस पुराने केवल-कागज़ नियम को अद्यतन कर इलेक्ट्रॉनिक संचार को भी मान्यता दी है, जिससे डिजिटल अदालती प्रक्रियाओं की ओर परिवर्तन झलके, जबकि वही सुरक्षा बनी रहे: यह प्रमाण कि समन वास्तव में अदालत से ही आया है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: अदालत का समन हमेशा भौतिक कागज़ी दस्तावेज़ ही होना चाहिए।
तथ्य: इस धारा के तहत, डिजिटल हस्ताक्षर या मुहर-छवि सहित एन्क्रिप्टेड/इलेक्ट्रॉनिक समन समान रूप से वैध है।
मिथक: कोई भी अदालत कर्मचारी समन पर हस्ताक्षर कर सकता है।
तथ्य: केवल अध्यक्षता करने वाला अधिकारी (प्रेसाइडिंग ऑफिसर), या उच्च न्यायालय के नियमों से विशेष रूप से अधिकृत कोई अन्य अधिकारी, इस पर हस्ताक्षर कर सकता है।