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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 152

Conditional order for removal of nuisance

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान औपनिवेशिक युग के सार्वजनिक उपद्रव विधि से आता है (पुराने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133, जिसकी जड़ें 19वीं सदी में अंग्रेजी उपद्रव सिद्धांतों के संहिताकरण में हैं)। इसका उद्देश्य स्थानीय मजिस्ट्रेटों को सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य की रक्षा हेतु तेज़, कम औपचारिकता वाला साधन देना था—जैसे अवरुद्ध सड़कों को साफ़ कराना, खतरनाक धंधे रोकना, या असुरक्षित संरचनाएँ सुरक्षित कराना—बिना लंबी दीवानी वाद-प्रक्रिया की प्रतीक्षा किए। ‘सशर्त आदेश’ (conditional order) की संरचना गति (तत्काल अंतरिम आदेश) और निष्पक्षता (प्रभावित व्यक्ति को आदेश अंतिम होने से पहले कारण बताने का अवसर) के बीच संतुलन बनाती है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

उच्चतम न्यायालय के विख्यात निर्णय Municipal Council, Ratlam v. Vardichand (1980) ने इसी प्रावधान (तत्कालीन धारा 133 दंप्रसं) का उपयोग कर एक नगरपालिका को खुले नालों और सीवर की समस्या, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक थी, दुरुस्त करने के लिए बाध्य किया, यह ठहराते हुए कि बजटीय बाधाएँ सिद्ध उपद्रव की स्थिति में निष्क्रियता का औचित्य नहीं बन सकतीं। न्यायालयों ने लगातार इसे संक्षिप्त, निवारक उपचार माना है—न कि निजी अधिकारों पर पूर्ण दीवानी वाद का विकल्प—और उपधारा (2) द्वारा दीवानी न्यायालयों पर लगे प्रतिबंध को संकीर्ण रूप से पढ़ते हुए उच्च आपराधिक न्यायालयों को (पुनरीक्षण के माध्यम से) यह जाँचने की अनुमति दी है कि मजिस्ट्रेट ने समुचित प्रक्रिया का पालन किया या नहीं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा मजिस्ट्रेटों को पड़ोसियों के बीच निजी संपत्ति विवाद निपटाने की अनुमति देती है।

    तथ्य: न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल उन सार्वजनिक उपद्रवों के लिए है जो व्यापक समुदाय को प्रभावित करते हैं; निजी दीवानी अधिकारों के विवाद सामान्य दीवानी वाद-प्रक्रिया से ही निपटाए जाने चाहिए।

  • मिथक: एक बार मजिस्ट्रेट का आदेश बन जाने पर, उसे कभी भी कहीं चुनौती नहीं दी जा सकती।

    तथ्य: यद्यपि उपधारा (2) दीवानी न्यायालयों को इसे परखने से रोकती है, प्रभावित व्यक्ति मजिस्ट्रेट के समक्ष कारण बता सकता है, और यदि प्रक्रिया का पालन न हुआ हो तो उच्च आपराधिक न्यायालय पुनरीक्षण के माध्यम से आदेश की समीक्षा कर सकते हैं।