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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 143

Security for unexpired period of bond

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

बॉन्ड और जमानत-बॉन्ड प्रायः एक निश्चित अवधि या प्रयोजन के लिए होते हैं। जब कोई व्यक्ति ऐसे बॉन्ड का उल्लंघन करता है और वारंट के माध्यम से उसे पुनः अदालत में प्रस्तुत करना पड़ता है, तो पूर्व बॉन्ड व्यवहारतः निष्फल हो जाता है और शेष दायित्व-अवधि को विधिक रूप से सुरक्षित रखने हेतु उसके स्थान पर नया बॉन्ड आवश्यक होता है। यह प्रावधान, पुराने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 126 से आगे बढ़ाया गया, मूल बॉन्ड रद्द होने पर भी सुरक्षा-तंत्र की निरंतरता सुनिश्चित करता है ताकि कोई विधिक रिक्ति न रह जाए।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: नया बॉन्ड लेना मतलब मूल पूरी अवधि को फिर से शून्य से शुरू करना है।

    तथ्य: नई सुरक्षा केवल मूल बॉन्ड की अप्रयुक्त (शेष) अवधि को ही कवर करती है, पूरी पुरानी अवधि को नहीं।

  • मिथक: यह धारा किसी नए प्रकार का दंड निर्मित करती है।

    तथ्य: यह दंडित नहीं करती; यह केवल निष्प्रभावित हो चुके बॉन्ड के स्थान पर उसी प्रकार का नया बॉन्ड लेकर मूल दायित्व को विधिक रूप से प्रवर्तनीय बनाए रखती है।