Skip to content
सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 142

Power to release persons imprisoned for failing to give security

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

इस अध्याय के अंतर्गत सुरक्षा बांड (शांति बनाए रखने या सदाचार के लिए) दंड नहीं, बल्कि निवारक उपाय हैं। क्योंकि केवल बांड की व्यवस्था न कर पाने के कारण किसी को जेल भेजना स्वतंत्रता पर गंभीर रोक है, कानून में एक राहत-उपाय रखा गया है—मजिस्ट्रेट ऐसे लोगों को समय से पहले रिहा कर सकते हैं, बांड की शर्तें हल्की कर सकते हैं, या मुचलकों को वापस लेने दे सकते हैं—ताकि निवारक नजरबंदी अनिश्चितकालीन या असंगत न हो जाए।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: सुरक्षा देने में विफल रहने के कारण जेल जाना यह दर्शाता है कि व्यक्ति ने अपराध किया है।

    तथ्य: यह कारावास दंडात्मक नहीं, निवारक है—यह केवल इसलिए होता है कि व्यक्ति सुरक्षा बांड जमा नहीं कर सका, न कि इसलिए कि उसे किसी अपराध का दोषी ठहराया गया।

  • मिथक: एक बार सशर्त रिहा हो जाने पर व्यक्ति चाहे जैसा व्यवहार करे, वह हमेशा के लिए स्वतः मुक्त रहता है।

    तथ्य: शर्तें मूल सुरक्षा-अवधि समाप्त होने तक लागू रहती हैं, और उनका उल्लंघन पुनः-गिरफ्तारी तथा अधूरी अवधि के लिए वापस जेल भेजे जाने का कारण बन सकता है।