Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 124
Application of this Chapter
The Central Government may, by notification in the Official Gazette, direct that the application of this Chapter in relation to a contracting State with which reciprocal arrangements have been made, shall be subject to such conditions, exceptions or qualifications as are specified in the said notification.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह अध्याय भारत और अन्य देशों के बीच पारस्परिक कानूनी व्यवस्थाओं से संबंधित है—जैसे समन की तामीली, वारंट का क्रियान्वयन, या सीमापार साक्ष्य एकत्र करना। क्योंकि हर देश की विधि-व्यवस्था और संधि-शर्तें अलग होती हैं, संसद ने केंद्र सरकार को यह लचीलापन दिया कि वह एक-सा कठोर नियम सभी पर थोपने के बजाय, देश-दर-देश इन नियमों के लागू होने का ढंग अनुकूलित कर सके। यह पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता की समान व्यवस्था का प्रतिरूप है, जिसमें सरकारी अधिसूचनाओं के माध्यम से सीमापार सहयोग वाले अध्यायों को प्रत्येक संधि-भागी के अनुरूप ढाला जा सकता था।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह धारा स्वयं विदेशी देशों के साथ सहयोग-समझौते नहीं बनाती।
तथ्य: यह समझौते नहीं बनाती—यह केवल तब सरकार को यह अधिसूचित करने की शक्ति देती है कि किसी देश पर इस अध्याय के वर्तमान नियम किस प्रकार लागू होंगे, जब कोई पारस्परिक व्यवस्था पहले से अस्तित्व में हो।
मिथक: सरकार इस अध्याय को बिना किसी शर्त के अपनी इच्छा से किसी भी देश पर लागू कर सकती है—ऐसा नहीं है।
तथ्य: यह धारा केवल ‘संविदात्मक राज्य’ (contracting States)—यानी जिन देशों के साथ पारस्परिक व्यवस्थाएँ पहले से हो चुकी हैं—पर लागू होती है, और कोई भी अनुप्रयोग एक प्रकाशित राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से ही किया जा सकता है, जिसमें शर्तें या अपवाद सम्मिलित हो सकते हैं।