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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 396

Victim compensation scheme

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

कुछ अपराध‑पीड़ितों को कभी दोषसिद्धि नहीं मिलती, बल्कि अपराधी की पहचान तक नहीं हो पाती; और जुर्माने‑आधारित मुआवज़ा मॉडल (धारा 395) पूरी तरह इस बात पर निर्भर है कि दोषसिद्धि हो और जुर्माना लगे। यह धारा सरकार द्वारा वित्तपोषित एक सुरक्षा‑जाल बनाती है, ताकि न्यायालयों की संस्तुतियों और पीड़ितों के अधिकारों को मान्यता देने वाले संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप, आपराधिक न्याय प्रक्रिया से दोषसिद्धि न हो पाने पर भी पीड़ित अपने जीवन के पुनर्निर्माण के लिए सहायता प्राप्त कर सकें।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है: पीड़ित मुआवज़ा केवल तभी उपलब्ध नहीं है जब अपराधी दोषसिद्ध हो और जुर्माना लगाया जाए।

    तथ्य: यह धारा सरकार द्वारा वित्तपोषित एक पृथक योजना प्रदान करती है, जो तब भी पीड़ितों को मुआवज़ा दे सकती है जब अपराधी का कभी पता न चले या मामला बरी होने पर समाप्त हो जाए, बशर्ते पीड़ित को पुनर्वास की आवश्यकता हो।