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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 395

Order to pay compensation

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

केवल आपराधिक दंड से पीड़ितों को हुआ नुकसान नहीं भरता। यह धारा आपराधिक न्यायालय को स्वयं पीड़ितों को राहत दिलाने का निर्देश देने देती है—चाहे अपराधी के जुर्माने से हो या अलग प्रतिकर आदेश से—यह मानते हुए कि पीड़ित के लिए न्याय, केवल अपराधी को दंडित करना ही नहीं, आपराधिक प्रक्रिया का मूल तत्व है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

उच्चतम न्यायालय ने ठहराया है कि जहाँ भी दंड दिया जाता है, न्यायालयों को अपने विचार लगाकर पीड़ित को प्रतिकर देने पर विचार करना चाहिए, और इसे कभी-कभार प्रयोग होने वाली शक्ति नहीं बल्कि अनिवार्य कर्तव्य मानना चाहिए; प्रतिकर पर विचार न करना स्वयं अपील का आधार बन सकता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: पीड़ितों को प्रतिकर केवल तभी मिलता है जब अलग से सिविल मुकदमा दायर किया जाए।

    तथ्य: यह धारा उसी आपराधिक न्यायालय को, अलग सिविल वाद की आवश्यकता के बिना, सजा का हिस्सा बनाकर या उसके साथ-साथ सीधे प्रतिकर का आदेश देने देती है।