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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 123

Procedure in respect of letter of request

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान आपराधिक मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अध्याय का भाग है, जिसे ‘परस्पर विधिक सहायता’ [mutual legal assistance] कहा जाता है। जब भारतीय न्यायालयों को किसी विदेशी न्यायालय की मदद चाहिए (जैसे विदेश में रह रहे व्यक्ति को समन तामील कराना) या किसी विदेशी देश को भारत से मदद चाहिए, तो ये दस्तावेज पहले केन्द्रीय सरकार से होकर गुजरते हैं, क्योंकि केवल सरकार ही अन्य राष्ट्रों से आधिकारिक रूप से व्यवहार कर सकती है। यह धारा सरकार को प्रयुक्त प्रपत्रों और माध्यमों को मानकीकृत करने का अधिकार देती है, ताकि हर बार तदर्थ उपायों के बजाय ऐसे अनुरोधों के निपटारे के लिए एक समान, पूर्वानुमेय तंत्र रहे।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: भारतीय न्यायालय सीधे विदेश में रहने वाले व्यक्तियों या विदेशी न्यायालयों को समन या वारंट भेज सकते हैं।

    तथ्य: ऐसे दस्तावेज केन्द्रीय सरकार के माध्यम से जाएँगे, जो उन्हें अपने द्वारा आधिकारिक रूप से अधिसूचित तरीके से अग्रेषित करती है।