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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 91

repealed

Exclusion of acts which are offences independently of harm cause

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएँ 87–89 उस स्थिति में दंडनीयता से अपवाद बनाती हैं जब कोई व्यक्ति हानि के जोखिम के लिए सहमति देता है (जैसे खेल-कूद या चिकित्सीय उपचार में) या जब किसी के हित में सद्भावना से कार्य किया जाता है (जैसे चिकित्सक द्वारा रोगी का उपचार)। धारा 91 इसलिए जोड़ी गई कि सहमति-आधारित बचाव का दुरुपयोग कर उन कृत्यों को माफ़ न किया जा सके जो अपने आप में स्वतंत्र अपराध हैं—जैसे अवैध गर्भपात या द्वंद्वयुद्ध—चाहे हानि हुई हो या नहीं। यह रेखा खींचती है: सहमति हानि को माफ़ कर सकती है, पर किसी स्वभाव से ही अवैध कृत्य को वैध नहीं बना सकती।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यदि मैं किसी बात पर सहमति दे दूँ, तो दूसरे व्यक्ति को कभी दंडित नहीं किया जा सकता।

    तथ्य: सहमति केवल संबंधित हानि के दायित्व से बचाव देती है (धारा 87–89 के तहत)। यदि कृत्य अन्य कारणों से अपराध है, तो धारा 91 स्पष्ट करती है कि सहमति उसे माफ़ नहीं करती।

  • मिथक: धारा 91 कोई नया अपराध निर्मित करती है।

    तथ्य: धारा 91 कोई नया अपराध परिभाषित नहीं करती। यह बस इतना करती है कि धाराएँ 87, 88 और 89 में दी गई सहमति-आधारित अपवादों को प्रतिरक्षा के रूप में इस्तेमाल करने की सीमा तय करती है।