यह लेख भारतीय वाद-विवाद में बार‑बार होने वाले एक भ्रम को समझाता है: जीएसटी रिफंड पर केरल उच्च न्यायालय का एक निर्णय तमिलनाडु में किसी कर अधिकारी या न्यायालय पर बाध्यकारी नहीं होता। वह अन्यत्र केवल प्रेरक महत्व रखता है, बाध्यकारी विधि नहीं, भले ही वह जीएसटी अधिनियम जैसे किसी केंद्रीय क़ानून की व्याख्या करता हो।

संवैधानिक दृष्टि से, केवल अनुच्छेद 141 ही सर्वोच्च न्यायालय के विधि‑निर्णयों को भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी बनाता है। अनुच्छेद 214 और 216 के अंतर्गत स्थापित उच्च न्यायालय, अनुच्छेद 226 के अधीन रिट शक्तियों और अनुच्छेद 227 के अधीन पर्यवेक्षणीय नियंत्रण का प्रयोग सख्ती से अपने भौगोलिक अधिकार‑क्षेत्र के भीतर ही करते हैं; इसी प्रकार, अनुच्छेद 235 जनपदीय (जिला) न्यायपालिका पर नियंत्रण को संबंधित राज्य के अपने उच्च न्यायालय तक सीमित करता है। अनुच्छेद 215 के अधीन ‘अभिलेख न्यायालय’ होने से उच्च न्यायालय की अपनी कार्यवाही संरक्षित रहती है, पर उसका बाध्यकारी प्राधिकार उसके क्षेत्र से बाहर विस्तृत नहीं होता। केंद्रीय विधान पर उच्च न्यायालयों के परस्पर विरोधी दृष्टिकोणों का निवारण केवल सर्वोच्च न्यायालय करता है, जिसमें अनुच्छेद 136 के माध्यम से भी शामिल है।

परीक्षा के लिए निष्कर्ष: अनुच्छेद 141 = पूरे भारत में बाध्यकारी नज़ीर (केवल सर्वोच्च न्यायालय); अनुच्छेद 226/227/235 = उच्च न्यायालय अधिकार‑प्राधिकार की भौगोलिक सीमाएँ; उच्च न्यायालय के निर्णय अपने अधिकार‑क्षेत्र में बाध्यकारी, उसके बाहर प्रेरक।