The Constitution of India
अनुच्छेद 136
अपील के लिए उच्चतम न्यायालय की विशेष इजाजत
अपील के लिए उच्चतम न्यायालय की विशेष इजाजत— (1) इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, उच्चतम न्यायालय अपने विवेकानुसार भारत के राज्यक्षेत्र में किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा किसी वाद या मामले में पारित किए गए या दिए गए किसी निर्णय, डिक्री, अवधारण, दंडादेश या आदेश की अपील के लिए विशेष इजाजत दे सकेगा । (2) खंड (1) की कोई बात सशस्त्र बलों से संबंधित किसी विधि द्वारा या उसके अधीन गठित किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा पारित किए गए या दिए गए किसी निर्णय, अवधारण, दंडादेश या आदेश को लागू नहीं होगी ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
संविधान-निर्माताओं ने चाहा था कि सर्वोच्च न्यायालय के पास एक अवशिष्ट और लचीली शक्ति रहे, ताकि जब सामान्य अपील का कोई अधिकार न हो तब भी वह गम्भीर अन्याय या महत्त्वपूर्ण विधिक भूलों को सुधार सके, क्योंकि भारत की अदालतों और अधिकरणों की व्यवस्था व्यापक और विविध है। यह ‘स्पेशल लीव’ की शक्ति ब्रिटिश शासनकाल के दौरान भारतीय अदालतों पर प्रिवी काउंसिल के समान विवेकाधीन अपीली अधिकार से प्रेरित थी। सशस्त्र बलों का अपवाद इसलिए जोड़ा गया क्योंकि सैन्य न्याय को सामान्य दीवानी अपीलीय समीक्षा से प्रायः अलग, स्वावलंबी प्रणाली के रूप में रखा जाना था।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
सर्वोच्च न्यायालय ने बार‑बार कहा है कि अनुच्छेद 136 एक असाधारण, अवशिष्ट शक्ति है, जिसका उपयोग संयम से और केवल उन्हीं अपवादात्मक मामलों में होना चाहिए जिनमें गंभीर विधिक प्रश्न, घोर अन्याय, या प्रक्रिया में गम्भीर विफलता हो — इसे सामान्य ‘चौथी अपील’ की तरह नहीं लिया जा सकता। Pritam Singh v. State (1950) और Kunhayammed v. State of Kerala (2000) जैसे मामलों में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विशेष अनुमति देना पूर्णतः विवेकाधीन है और इससे स्वतः अपील का अधिकार उत्पन्न नहीं होता; इस विवेक का प्रयोग विरल और सावधानी से होना चाहिए। यह भी माना गया है कि एक बार अनुमति मिल जाए तो मामला नियमित अपील के रूप में चलाया जाता है, परन्तु केवल विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) खारिज होने से यह नहीं मान लिया जाता कि सर्वोच्च न्यायालय ने निम्न अदालत की तर्कणा से सहमति जताई।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: जो भी व्यक्ति मुक़दमा हारे, वह अनुच्छेद 136 के तहत स्वतः ही सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।
तथ्य: सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है (उदा., Pritam Singh v. State, 1950) कि अनुच्छेद 136 एक विवेकाधीन शक्ति देता है, कोई स्वतःसिद्ध अधिकार नहीं — अदालत स्वयं तय करती है कि मामला सुना जाए या नहीं।
मिथक: अनुच्छेद 136 सैन्य अदालतों के फ़ैसलों पर भी लागू होता है।
तथ्य: उपबंध (2) स्पष्ट रूप से उन न्यायनिर्णयों या आदेशों को अपवर्जित करता है जो सशस्त्र बलों से संबंधित क़ानूनों के अधीन गठित न्यायालयों या अधिकरणों द्वारा दिए गए हों।