The Constitution of India
अनुच्छेद 135
विद्यमान विधि के अधीन फेडरल न्यायालय की अधिकारिता और शक्तियों का उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य होना
विद्यमान विधि के अधीन फेडरल न्यायालय की अधिकारिता और शक्तियों का उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य होना— जब तक संसद् विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे तब तक उच्चतम न्यायालय को भी किसी ऐसे विषय के संबंध में, जिसको अनुच्छेद 133 या अनुच्छेद 134 के उपबंध लागू नहीं होते हैं, अधिकारिता और शक्तियां होंगी यदि उस विषय के संबंध में इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले किसी विद्यमान विधि के अधीन अधिकारिता और शक्तियां फेडरल न्यायालय द्वारा प्रयोक्तव्य थीं ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
1950 से पहले भारत का सर्वोच्च न्यायालय ‘Federal Court’ था, जो Government of India Act, 1935 के अंतर्गत स्थापित हुआ था। यह कुछ अपीलों की सुनवाई करता था, खासकर संघीय (केन्द्र–राज्य) विवादों और कुछ आपराधिक मामलों की, जो नए संविधान के अनुच्छेद 133 (दीवानी अपील) और 134 (आपराधिक अपील) में समाहित नहीं थे। जब सर्वोच्च न्यायालय ने संघीय न्यायालय का स्थान लिया, तो संविधान-निर्माताओं ने निरंतरता चाही—अधिकार-क्षेत्र में कोई शून्य न रहे। अनुच्छेद 135 ने सुनिश्चित किया कि संविधान-पूर्व कानूनों के अधीन संघीय न्यायालय की जो भी शेष शक्तियाँ थीं, वे संसद द्वारा विशेष नियम बनाए जाने तक सीधे सर्वोच्च न्यायालय को चलती रहें।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
न्यायालयों ने अनुच्छेद 135 को एक संक्रमणकालीन सेतु-विधान के रूप में माना है, जो नए स्वतंत्र अपील-अधिकार पैदा करने के बजाय अधिकार-क्षेत्र की निरंतरता सुनिश्चित करता है। इसे अनुच्छेद 133 और 134 के साथ पढ़ा गया है ताकि उनके द्वारा छोड़े गए अंतराल भरे जा सकें, विशेषकर संविधान-पूर्व कानूनों से संचालित विषयों में जैसे कुछ आपराधिक या संघीय-न्यायालय अपीलें। समय के साथ, संसद द्वारा सीधे इन क्षेत्रों को कवर करने वाले विशेष कानून (जैसे आपराधिक प्रक्रिया संहिता और विविध अपीलीय अधिनियम) बनाए जाने पर इसकी व्यावहारिक महत्ता घटती गई।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: अनुच्छेद 135 सर्वोच्च न्यायालय को अनुच्छेद 133 और 134 से अलग स्थायी विशेष शक्तियाँ नहीं देता।
तथ्य: यह केवल उन्हीं विषयों की रिक्तियाँ भरता है जो उन अनुच्छेदों में शामिल नहीं हैं, और वह भी तब तक जब तक संसद कोई विशेष कानून न बना दे—यह एक संक्रमणकालीन सुरक्षा-जाल है, कोई स्वतंत्र व स्थायी शक्ति नहीं।