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सं Samvidhan

Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023

धारा 115

Presumption as to certain offences

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान Indian Evidence Act, 1872 की धारा 114A की निरंतरता है, जिसे 1983 में तीव्र उग्रवाद और नागरिक अशांति (उदाहरणतः पंजाब) के दौर में जोड़ा गया था, जब भीड़ों या इमारतों के भीतर से सुरक्षा बलों पर बार-बार आग्नेयास्त्रों और विस्फोटकों से हमले होते थे। दंगे जैसी अराजक परिस्थितियों में व्यक्तिगत दोष सिद्ध करना अत्यंत कठिन था, इसलिए विधायकों ने भार-ए-प्रमाण को आंशिक रूप से पलटा: यदि कोई व्यक्ति उस स्थान पर मौजूद मिले जहाँ से सुरक्षा बलों पर हमला शुरू हुआ, तो अभियोजन को शून्य से सब कुछ साबित करने के बजाय उस व्यक्ति पर यह दायित्व होगा कि वह अपनी मौजूदगी का स्पष्टीकरण दे और सहभागिता से इनकार को सिद्ध करे।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा कहती है कि व्यक्ति स्वतः दोषी माना जाएगा और उसे बचाव का कोई अवसर नहीं मिलेगा।

    तथ्य: यह अनुमेय अनुमान खंडनीय है—व्यक्ति साक्ष्य प्रस्तुत करके दिखा सकता है कि उसने अपराध नहीं किया; यह केवल इस बात को बदलता है कि सबूत का भार किस पर है।

  • मिथक: यह किसी भी अपराध पर लागू होता है जो दंगाग्रस्त क्षेत्र में किया गया हो।

    तथ्य: यह केवल उपधारा (2) में सूचीबद्ध अवैध-सभा/दंगा संबंधी विशिष्ट अपराधों पर लागू होता है, और तभी जब उस व्यक्ति के स्थान से सशस्त्र बलों या लोक-व्यवस्था बलों पर आग्नेयास्त्रों या विस्फोटकों का प्रयोग किया गया हो।