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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 491

Procedure when bond has been forfeited

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

बंधनपत्र और जमानत बंधपत्रों की प्रणाली तभी कारगर रहती है जब वादाख़िलाफ़ी के वास्तविक परिणाम हों। यह प्रावधान न्यायालयों को एक स्पष्ट व निष्पक्ष प्रक्रिया देता है—बंधपत्र को जब्त घोषित करना, बंधपत्रधारी की बात सुनना, और फिर राशि वसूल करना—साथ ही ऐसे ज़मानतदाताओं की रक्षा करता है जिनकी मृत्यु किसी उल्लंघन से पहले हो गई हो और न्यायालयों को कठोर दण्ड में कुछ रियायत देने का लचीलापन भी प्रदान करता है। यह पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 446 का स्थान लेकर बीएनएसएस (BNSS) में मुख्यतः समान नियम स्थापित करता है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने लम्बे समय से माना है कि दंप्रसं की समकक्ष धारा के अधीन जब्ती कार्यवाही अर्ध-दंडात्मक प्रकृति की होती है; इसलिए दण्ड लागू करने से पहले ज़मानतदाता को वास्तविक रूप से कारण बताने का अवसर दिया जाना अनिवार्य है; जब्ती को स्वतःस्फूर्त औपचारिकता की तरह नहीं माना जा सकता।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यदि अभियुक्त का पता ही न चल पाए, तो ज़मानतदाता का वादा स्वतः समाप्त हो जाता है।

    तथ्य: ज़मानतदाता को अनुपस्थिति का पर्याप्त कारण दिखाना होगा; मात्र अभियुक्त का न मिल पाना अपने आप में वैध बहाना नहीं है।

  • मिथक: यदि ज़मानतदाता की मृत्यु हो जाए, तो परिवार को जब्त किए गए किसी भी बंधपत्र की राशि फिर भी चुकानी होगी।

    तथ्य: यदि ज़मानतदाता की मृत्यु बंधपत्र के वास्तव में जब्त होने से पहले हो जाए, तो उसकी संपत्ति उस बंधपत्र के अधीन देयता से मुक्त हो जाती है।