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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 68

Sexual intercourse by a person in authority

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान मानता है कि अधिकार-स्थिति वाले लोग—जेलर, चिकित्सक, सरकारी अधिकारी—स्पष्ट बल या धमकी का प्रयोग किए बिना भी अपने नियंत्रण में रहने वाली महिलाओं की असुरक्षा और निर्भरता का शोषण कर सकते हैं, जो बलात्कार की परिभाषा में न आ पाए। ऐतिहासिक रूप से ऐसे प्राधिकार-दुरुपयोग (जैसे, अभिरक्षा या संस्थागत शोषण) के मामलों पर भारत के पूर्ववर्ती आईपीसी की धारा 376C के तहत कार्रवाई होती थी, जिसे अभिरक्षा में यौन शोषण के मामलों पर जन आक्रोश के बाद जोड़ा गया था। यह कानून उस कमी को भरता है जहाँ सहमति दिखती तो है, पर वह वास्तविक नहीं होती और असमान शक्ति-संतुलन के कारण उत्पन्न दबाव का परिणाम होती है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा तभी लागू होती है जब शारीरिक बल का प्रयोग हुआ हो।

    तथ्य: यह धारा बिना बल प्रयोग के भी लागू होती है—यदि व्यक्ति ने अपने अधिकार या विश्वासी संबंध का उपयोग कर महिला पर दबाव डाला या उसे राज़ी किया, तो वही पर्याप्त है।

  • मिथक: यदि महिला ने सहमति देती हुई दिखाई दी, तो अपराध नहीं बनता।

    तथ्य: कानून मानता है कि शक्ति के दुरुपयोग से ली गई ‘मंज़ूरी’ स्वतंत्र सहमति के समान नहीं होती; इसलिए ऐसी स्थिति में भी यह धारा लागू होकर अपराध बन सकता है।