Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
धारा 69
Sexual intercourse by employing deceitful means, etc
Whoever, by deceitful means or by making promise to marry to a woman without any intention of fulfilling the same, has sexual intercourse with her, such sexual intercourse not amounting to the offence of rape, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years and shall also be liable to fine. Explanation.— “deceitful means” shall include inducement for, or false promise of employment or promotion, or marrying by suppressing identity.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
भारतीय न्यायालय लंबे समय से ऐसे मामलों से जूझते रहे हैं जहाँ पुरुषों ने विवाह का वादा करके या अपनी वास्तविक पहचान/पहले से विद्यमान विवाह छिपाकर स्त्रियों से यौन संबंध बनाए और बाद में उन्हें छोड़ दिया। पहले ऐसे मामलों को प्रायः पुराने दंड संहिता की धारा 375/376 के तहत ‘कपट से बलात्कार’ के रूप में चलाया जाता था, जिससे यह भ्रम पैदा होता था कि कब टूटा हुआ वादा अपराध है और कब केवल निजी विवाद या विश्वासभंग। भारतीय दंड संहिता का स्थान लेने वाली भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) ने धारा 69 जोड़कर कपटपूर्ण यौन संबंध और विवाह के झूठे वादे को अलग अपराध के रूप में आपराधीकृत किया, ताकि इसे बलात्कार से अलग पहचानते हुए भी दंडनीय रखा जा सके।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
BNS से पहले भी, उच्चतम न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने (जैसे Deepak Gulati v. State of Haryana, 2013, तथा Anurag Soni v. State of Chhattisgarh, 2019) यह माना था कि विवाह का झूठा वादा तभी पुराने कानून के तहत बलात्कार ठहरेगा जब पुरुष का प्रारंभ से ही विवाह का कोई इरादा न हो और उसने विशेष रूप से सहमति प्राप्त करने के लिए ही वह झूठा वादा किया हो। न्यायालयों ने इसे उन मामलों से अलग रखा जिनमें वास्तविक संबंध बाद में अन्य कारणों से टूट गया—जो आपराधिक नहीं है। धारा 69 इस न्यायिक तर्क को एक अलग, स्वायत्त अपराध के रूप में संहिताबद्ध करती प्रतीत होती है, बलात्कार प्रावधान से अलग रखते हुए; हालांकि BNS नया होने से इस धारा की न्यायिक व्याख्या अभी विकसित हो रही है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह धारा कहती है कि जो भी संबंध विवाह में न बदले, वह अपराध है।
तथ्य: न्यायालयों ने स्पष्ट किया है (BNS-पूर्व निर्णयों, जैसे Deepak Gulati में) कि यह तभी लागू होता है जब विवाह का वादा शुरू से ही झूठा हो और विशेष रूप से सहमति प्राप्त करने के लिए किया गया हो—न कि तब, जब कोई वास्तविक संबंध अन्य कारणों से बाद में असफल हो जाए।
मिथक: यह धारा बलात्कार के समान है और वही सज़ा देती है।
तथ्य: पाठ स्पष्ट करता है कि यह केवल तभी लागू होता है जब कृत्य बलात्कार न हो; दंड (अधिकतम 10 वर्ष) भी बलात्कार के लिए निर्धारित दंड से अलग है।