The Constitution of India
अनुच्छेद 354
जब आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन में है तब राजस्वों के वितरण संबंधी उपबंधों का लागू होना
जब आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन में है तब राजस्वों के वितरण संबंधी उपबंधों का लागू होना— (1) जब आपात की उद्घोषणा प्रवर्तन में है तब राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकेगा कि इस संविधान के अनुच्छेद 268 से अनुच्छेद 279 के सभी या कोई उपबंध ऐसी किसी अवधि के लिए, जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए और जो किसी भी दशा में उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से आगे नहीं बढ़ेगी, जिसमें ऐसी उद्घोषणा प्रवर्तन में नहीं रहती है, ऐसे अपवादों या उपान्तरणों के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे, जो वह ठीक समझे । (2) खंड (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, किए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीध्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा ।
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
अनुच्छेद 268 से 279 संघ और राज्यों के बीच सामान्य वित्तीय संबंध निर्धारित करते हैं—करों की वसूली, बँटवारा और वितरण कैसे होगा। राष्ट्रीय आपातकाल में सरकारी वित्त पर भारी दबाव आ सकता है और सामान्य राजस्व-साझेदारी व्यावहारिक या टिकाऊ न रह जाए। संविधान-निर्माताओं ने अनुच्छेद 354 इसलिए जोड़ा कि संकट की घड़ी में संघ सरकार को इन वित्तीय व्यवस्थाओं में अस्थायी समायोजन करने की लचीलापन मिल सके, ताकि देश शांति-कालीन राजकोषीय नियमों में बँध कर आपात स्थितियों का सामना करने में अक्षम न हो। आदेश को संसद के समक्ष रखने की शर्त इस कार्यपालिका-शक्ति पर एक नियंत्रण सुनिश्चित करती है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: अनुच्छेद 354 राष्ट्रपति को संघ और राज्यों के बीच कर-विभाजन के नियम स्थायी रूप से बदलने की अनुमति देता है—यह कथन गलत है।
तथ्य: यह परिवर्तन सख्ती से अस्थायी होता है—यह उस वित्तीय वर्ष के अंत से आगे नहीं बढ़ सकता जिसमें आपातकाल समाप्त होता है।
मिथक: राष्ट्रपति यह शक्ति केवल वित्तीय सुविधा के लिए कभी भी नहीं इस्तेमाल कर सकते—यह कथन गलत है।
तथ्य: यह शक्ति तभी प्रयोग की जा सकती है जब आपातकाल की उद्घोषणा वास्तव में प्रभावी हो।