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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 268

संघ द्वारा उद्गृहीत किए जाने वाले किंतु राज्यों द्वारा संगृहीत और विनियोजित किए जाने वाले शुल्क

संघ द्वारा उद्गृहीत किए जाने वाले किंतु राज्यों द्वारा संगृहीत और विनियोजित किए जाने वाले शुल्क — (1) ऐसे स्टांप-शुल्क 2*** जो संघ सूची में वर्णित हैं, भारत सरकार द्वारा उद्गृहीत किए जाएंगे, किंतु — (क) उस दशा में, जिसमें ऐसे शुल्क 3संघ राज्यक्षेत्र] के भीतर उद्ग्रहणीय हैं, भारत सरकार द्वारा; और (ख) अन्य दशाओं में जिन-जिन राज्यों के भीतर ऐसे शुल्क उद्ग्रहणीय हैं, उन-उन राज्यों द्वारा, संगृहीत किए जाएंगे । (2) किसी राज्य के भीतर उद्ग्रहणीय किसी ऐसे शुल्क के किसी वित्तीय वर्ष में आगम, भारत की संचित निधि के भाग नहीं होंगे, किन्तु उस राज्य को सौंप दिए जाएंगे ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारत का संविधान कुछ शुल्कों पर कानून बनाने की शक्ति संघ को देता है (देशभर में एकरूपता के लिए), पर साथ ही यह मानता है कि राज्यों को प्रत्यक्ष राजस्व चाहिए। अनुच्छेद 268 इस संतुलन को साधता है—विशेष शुल्कों (मुहर शुल्क और औषधीय/टॉयलेट-तैयारियों पर उत्पाद) के लिए कानून व दरें केंद्र तय करता है, जबकि वसूली की व्यवस्था और प्राप्ति स्वयं राज्यों को सौंपी जाती है। इससे कर प्रशासन का दोहराव नहीं होता और राज्यों को स्थानीय रूप से वसूले जाने वाले मदों से सुनिश्चित, चिह्नित आय-धारा मिलती है; यही संविधान के भाग XII के अंतर्गत सहकारी वित्तीय संघवाद की रूपरेखा का उद्देश्य है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने सामान्यतः अनुच्छेद 268 को एक सीधे-सरल वित्तीय संघवाद प्रावधान की तरह माना है, जो इन विशेष शुल्कों में ‘कौन अधिरोपित करेगा’ बनाम ‘कौन वसूलेगा और रखेगा’ को परिभाषित करता है। इसकी मूल कार्यप्रणाली का पुनर्व्याख्यायित करने वाला कोई प्रमुख मील का पत्थर निर्णय नहीं है, हालांकि न्यायालयों ने इसे अनुच्छेद 269 (वे कर जो संघ अधिरोपित व वसूल करता है पर राज्यों को आबंटित करता है) और अनुच्छेद 270 (साझा कर) से अलगाते हुए उद्धृत किया है, ताकि संविधान में केंद्र-राज्य राजस्व-वितरण के अलग-अलग मॉडल स्पष्ट हों।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: अनुच्छेद 268 का मतलब यह नहीं है कि चूंकि कानून केंद्र ने बनाया है, इसलिए यह कर-राशि केंद्र के पास रहेगी।

    तथ्य: यह अनुच्छेद विशेष रूप से कहता है कि किसी राज्य के भीतर वसूला गया धन केंद्र के निधि-कोष में नहीं जाएगा—वह उसी राज्य के पास रहेगा।

  • मिथक: अनुच्छेद 268 सभी प्रकार के उत्पाद शुल्कों पर लागू नहीं होता।

    तथ्य: यह केवल मुहर शुल्क और संघ सूची में निर्दिष्ट औषधीय व टॉयलेट-तैयारियों पर विशेष उत्पाद शुल्क तक सीमित है—सामान्य उत्पाद शुल्क पर नहीं।