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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 268A

repealed

संघ द्वारा उद्गृहीत किए जाने वाला और संघ तथा राज्यों द्वारा संगृहीत और विनियोजित किया जाने वाला सेवा-कर

सत्यापन प्रतीक्षित

संघ द्वारा उद्गृहीत किए जाने वाला और संघ तथा राज्यों द्वारा संगृहीत और विनियोजित किया जाने वाला सेवा-कर ।] — संविधान (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 की धारा 7 द्वारा (16-9-2016 से) लोप किया गया ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

इस अनुच्छेद के आने से पहले, सेवा कर संघ के अवशिष्ट कराधान अधिकार (प्रविष्टि 97, सूची I) के तहत लगाया जाता था, और संघ स्वेच्छा से हिस्सा न दे तो राज्यों को उसका सीधा भाग नहीं मिलता था। जैसे-जैसे सेवा-आधारित उद्योग बढ़े, राज्यों ने इस राजस्व में अपने हिस्से के संवैधानिक अधिकार की मांग की। 88वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 ने अनुच्छेद 268A जोड़कर सेवा कर को एक पृथक श्रेणी के रूप में मान्यता दी—वसूली केंद्र द्वारा, परंतु बाँटवारा संसद द्वारा बनाए जाने वाले सिद्धांतों के तहत राज्यों के साथ। हालांकि ‘वसूली और विनियोजन के सिद्धांत’ संबंधी कानून वर्षों तक टलता रहा, और अंततः वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने पर यह व्यवस्था निरस्त हो गई। 101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2016, जिसने GST लागू किया, ने अनुच्छेद 268A को पूरी तरह हटा दिया, क्योंकि सेवा कर एकीकृत GST ढाँचे में समाहित हो गया।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: अनुच्छेद 268A आज भी भारतीय संविधान का हिस्सा है।

    तथ्य: जब GST प्रणाली ने अलग सेवा कर प्रावधानों का स्थान ले लिया, तब 101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा इसे हटा दिया गया।

  • मिथक: इस अनुच्छेद के तहत राज्य सेवाओं पर स्वतंत्र रूप से कर लगा सकते थे।

    तथ्य: केवल भारत सरकार ही यह कर लगा सकती थी; राज्य सरकारें उसके आरोपण में सहभागी नहीं थीं, बल्कि केवल वसूली और प्राप्ति में भागीदार थीं।