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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 52A

repealed

Harbour

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारतीय दंड संहिता में ‘आश्रय देना’ (harbour) शब्द कई स्थानों पर आता है, जैसे चोरों, डकैतों या भागे हुए बंदियों को आश्रय देना। धारा 52A जोड़ी गई ताकि संहिता भर में ‘आश्रय देना’ का अर्थ स्पष्ट रहे और न्यायालयों को अनुमान न लगाना पड़े। इसमें जानबूझकर दो स्थितियाँ बाहर रखी गई हैं — धारा 157, और धारा 130 के तहत जीवनसाथी द्वारा दिया गया आश्रय — यह मानते हुए कि जीवनसाथी को अपने伴侣 के विरुद्ध अधिकारियों के सामने विश्वासघात करने के लिए बाध्य करना पारिवारिक निष्ठा और निजी अंतरात्मा से टकराता है; यही सिद्धांत धारा 212 में अपराधी को आश्रय देने के मामलों में जीवनसाथी-अपवाद में भी झलकता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: ‘आश्रय देना’ (harbour) का अर्थ केवल किसी को अपने घर में शारीरिक रूप से छिपा देना ही होता है।

    तथ्य: धारा 52A स्पष्ट करती है कि ‘आश्रय देना’ (harbour) में भोजन, धन, वस्त्र, हथियार, परिवहन या वह कोई भी सहायता शामिल है जो किसी को गिरफ़्तारी से बचाने के उद्देश्य से दी जाए।

  • मिथक: ‘आश्रय देना’ (harbour) की विस्तृत परिभाषा बिना किसी अपवाद के पूरे दंड संहिता में लागू होती है।

    तथ्य: यह धारा स्वयं दो अपवाद तय करती है — धारा 157, और धारा 130 में वह स्थिति जब आश्रय देने वाला व्यक्ति, सहायता पाने वाले का जीवनसाथी हो।