Indian Penal Code, 1860
धारा 157
repealedHarbouring persons hired for an unlawful assembly
Whoever harbours, receives or assembles, in any house or premises in his occupation or charge, or under his control any persons knowing that such persons have been hired, engaged or employed, or are about to be hired, engaged or employed, to join or become members of an unlawful assembly, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to six months, or with fine, or with both.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
1860 का भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) ने समूह-हिंसा और दंगों को बढ़ने से पहले रोकने के लिए अवैध जमाव (धारा 141 में परिभाषित) के इर्द-गिर्द अपराधों की एक शृंखला बनाई। धाराएँ 150 और 157 ऐसे जमाव के सहायक तंत्र पर निशाना साधती हैं—वे लोग जो भीड़ में शामिल होने के लिए दूसरों को किराये पर रखते हैं, और वे जो इन किराये के प्रतिभागियों को शरण या एकत्र होने की जगह देते हैं। उपनिवेशकालीन विधायकों का उद्देश्य केवल दंगाइयों को नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित ठिकाना या बैठक-स्थल देकर दंगा संभव बनाने वालों को भी हतोत्साहित करना था, यह मानते हुए कि संगठित अवैध जमाव बनने के लिए अक्सर रसद-सहायता की जरूरत होती है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: इस धारा के तहत दंडित होने के लिए आपको अवैध जमाव में सक्रिय रूप से भाग लेना अनिवार्य है।
तथ्य: कानून केवल यह अपेक्षा करता है कि आप जानते-बूझते अपनी संपत्ति को अवैध जमाव (अनलॉफल असेंबली) के लिए किराये पर रखे गए लोगों के ठहरने या जुटने के लिए उपलब्ध कराएँ—आपका स्वयं उस जमाव में शामिल होना आवश्यक नहीं है।
मिथक: यह धारा तभी लागू होती है जब अवैध जमाव वास्तव में हिंसा या नुकसान पहुँचाए।
तथ्य: अपराध तभी पूर्ण हो जाता है जब आप जानते-बूझते किराये पर रखे गए व्यक्तियों को शरण देते हैं या उन्हें इकट्ठा करते हैं; इसके लिए यह आवश्यक नहीं कि अवैध जमाव पहले ही कार्यवाही कर चुका हो या नुकसान हो चुका हो।