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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 376

repealed

Punishment for rape

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा 2012 के दिल्ली सामूहिक बलात्कार प्रकरण के बाद व्यापक रूप से संशोधित हुई और 2018 में बालिका बलात्कार के मामलों पर जनाक्रोश के पश्चात और सुदृढ़ की गई, ताकि पूर्व की अपेक्षाकृत उदार व्यवस्थाओं के स्थान पर अनिवार्य न्यूनतमों के साथ कठोर निवारक दंड ढाँचा स्थापित हो, जिनसे अदालतों को सजा कम करने का अत्यधिक विवेक मिलता था। यह विशेष रूप से मान्यता देती है कि शक्ति, भरोसे या प्राधिकार की स्थिति (जैसे पुलिस, लोक सेवक, सशस्त्र बल, अभिभावक/देखभालकर्ता) में बैठे व्यक्तियों द्वारा किया गया बलात्कार अधिक गंभीर है क्योंकि यह संरक्षण के दायित्व के गंभीर उल्लंघन का मामला है; और यह अत्यन्त कम आयु की लड़कियों के साथ बलात्कार पर विशेष रूप से कठोर दंड लगाती है, जो बाल पीड़ितों के प्रति समाज की बढ़ी हुई चिंता को दर्शाता है। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 में भी समान संरचना वाला दंड प्रावधान तुल्य न्यूनतम सजाओं के साथ बना हुआ है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने ठहराया है कि दस वर्ष (या सोलह वर्ष से कम आयु की पीड़िता के लिए बीस वर्ष) का न्यूनतम दंड अनिवार्य है और केवल असाधारण परिस्थितियों में, कारण दर्ज करते हुए, ही इसे घटाया जा सकता है; सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालय बार-बार रेखांकित कर चुके हैं कि अपराध के अत्यन्त निजी स्वभाव को देखते हुए, यदि पीड़िता का बयान विश्वसनीय और भरोसेमंद पाया जाए, तो बिना किसी पुष्टि-साक्ष्य के उसी के आधार पर दोषसिद्धि संभव है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है कि बलात्कार की दोषसिद्धि के लिए पीड़िता के कथन के अतिरिक्त अन्य गवाहों या भौतिक साक्ष्य की अनिवार्य आवश्यकता होती है।

    तथ्य: अदालतें बार-बार ठहरा चुकी हैं कि अपराध के निजी स्वरूप को देखते हुए, यदि पीड़िता/उत्तरजीवी का बयान विश्वसनीय और सुसंगत हो, तो अकेले वही दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त है।