Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023
धारा 69
Admission of execution by party to attested document
The admission of a party to an attested document of its execution by himself shall be sufficient proof of its execution as against him, though it be a document required by law to be attested.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
कुछ दस्तावेज़—जैसे वसीयत, बंधक विलेख और उपहार विलेख—के निष्पादन के प्रमाण हेतु विधिक रूप से अभिप्रमाणन (गवाहों द्वारा हस्ताक्षर) आवश्यक होता है। सामान्यतः इसका अर्थ है कि जिस पक्ष ने ऐसे दस्तावेज़ पर भरोसा किया है, उसे अदालत में किसी अभिप्रमाणित गवाह को पेश करना पड़ता है ताकि सिद्ध हो सके कि उस पर हस्ताक्षर हुए। यह उपबंध (पूर्व में Indian Evidence Act, 1872 की Section 70) एक व्यावहारिक शॉर्टकट देता है: यदि दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति स्वयं अदालत में मान ले कि उसने हस्ताक्षर किए थे, तो वह स्वीकृति उसके विरुद्ध पर्याप्त प्रमाण मानी जाएगी, और अभिप्रमाणित गवाहों को खोजकर बुलाने की समय‑और‑कठिनाई से मुक्ति मिलती है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतों ने प्रायः माना है कि यह उपबंध केवल तब अभिप्रमाणित गवाहों को बुलाने की आवश्यकता समाप्त करता है जब निष्पादक स्वयं निष्पादन स्वीकार करे; जहाँ कानून दस्तावेज़ की वैधता के लिए अभिप्रमाणन अनिवार्य ठहराता है (जैसे वसीयत या कुछ विलेख), वहाँ यह आवश्यकता समाप्त नहीं होती। स्वीकृति स्पष्ट होनी चाहिए और व्यक्ति के अपने हस्ताक्षर/निष्पादन के कृत्य से संबंधित होनी चाहिए। अदालतों ने अपने हस्ताक्षर मानने और दस्तावेज़ की विषयवस्तु/सामग्री की सच्चाई मानने के बीच भेद किया है—दूसरी बात अपने‑आप इस नियम के दायरे में नहीं आती।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह उपबंध इस अर्थ में नहीं है कि अभिप्रमाणित दस्तावेज़ों के लिए अब बिल्कुल भी किसी गवाह की आवश्यकता नहीं रहती।
तथ्य: कानून अब भी ऐसे दस्तावेज़ों की वैधता के लिए अभिप्रमाणन अनिवार्य मानता है; यह उपबंध केवल तभी अदालत में गवाह बुलाने की जरूरत हटाता है जब निष्पादक स्वयं निष्पादन स्वीकार कर ले।
मिथक: किसी दस्तावेज़ का अस्तित्व मान लेना या उसकी सामग्री को सच मान लेना, इस धारा के तहत निष्पादन स्वीकार करने के समान ही है—ऐसा नहीं है।
तथ्य: अदालतें इसे संकीर्ण रूप से पढ़ती हैं—स्वीकृति खास तौर पर व्यक्ति के अपने हस्ताक्षर/निष्पादन के कृत्य के बारे में होनी चाहिए, मात्र दस्तावेज़ में क्या लिखा है उसके बारे में नहीं।