Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 76
Warrant directed to police officer
A warrant directed to any police officer may also be executed by any other police officer whose name is endorsed upon the warrant by the officer to whom it is directed or endorsed.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
पुलिस का काम अक्सर लचीलेपन की मांग करता है — वारंट में मूल रूप से जिसका नाम है, वह अधिकारी व्यस्त, अवकाश पर, स्थानांतरित, या आपात स्थिति में अनुपलब्ध हो सकता है। यह प्रावधान (पुराने दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 74 से आगे बढ़ाया गया) उत्तरदायी अधिकारी को केवल सहकर्मी का नाम वारंट पर लिखकर विश्वसनीय सहयोगी को क्रियान्वयन सौंपने की अनुमति देता है, जिससे कानून प्रवर्तन में देरी न हो और अधिकृत व्यक्ति का स्पष्ट कागजी रिकॉर्ड बना रहे।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतों ने सामान्यतः एंडोर्समेंट को कठोर औपचारिकता के बजाय व्यावहारिक प्रशासनिक कदम माना है, और यह ठहराया है कि जब तक एंडोर्समेंट वास्तविक हो और उस मूल अधिकारी तक अनुरेखित हो सके जिसके नाम वारंट संबोधित था, तब तक एंडोर्स किए गए अधिकारी द्वारा किया गया क्रियान्वयन वैध है। न्यायाधीशों ने यह भी सावधानी बताई है कि एंडोर्समेंट में छोटी प्रक्रियात्मक त्रुटियों को अपनी आप में गिरफ्तारी को अवैध ठहराने का आधार न माना जाए; ध्यान इस पर होना चाहिए कि प्राधिकरण का सार्थक पालन हुआ या नहीं।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: केवल उसी अधिकारी को, जिसका नाम वारंट में है, व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार है।
तथ्य: कानून यह अनुमति देता है कि कोई दूसरा अधिकारी भी वारंट का क्रियान्वयन करे, बशर्ते उसका नाम सही ढंग से वारंट पर उस मूल नामित अधिकारी द्वारा या एंडोर्स करने के लिए विधिवत अधिकृत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लिख (एंडोर्स) दिया गया हो।
मिथक: एंडोर्समेंट कराने के लिए नया वारंट जारी करना आवश्यक है।
तथ्य: नए वारंट की आवश्यकता नहीं होती — मूल वारंट वैध बना रहता है; केवल एंडोर्स किए गए अधिकारी का नाम उसी पर जोड़ा जाता है।