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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 74

Warrants to whom directed

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

गिरफ्तारी वारंट सामान्यतः पुलिस अधिकारियों को सौंपे जाते हैं क्योंकि वे सुरक्षित और विधिसम्मत गिरफ्तारी के लिए प्रशिक्षित और वैधानिक रूप से अधिकृत होते हैं। तथापि, कानून आपात स्थितियों को पहचानता है — ऐसे हालात जब संदिग्ध भाग सकता है या विलंब होने पर हानि पहुँचा सकता है। यह प्रावधान, जो पूर्ववर्ती आपराधिक प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों (जिसमें पुराना Section 39 CrPC भी शामिल है) से चला आ रहा है, न्यायालयों को लचीलापन देता है ताकि केवल प्रशासनिक अनुपलब्धता के कारण न्याय ठप न पड़े, जबकि पुलिस को ही सामान्य और वांछित क्रियान्वयनकर्ता बनाए रखता है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने ऐतिहासिक रूप से दण्ड प्रक्रिया संहिता के समतुल्य प्रावधान (Section 39) को सामान्य नियम नहीं, बल्कि अपवाद के रूप में पढ़ा है — इस पर जोर देते हुए कि गैर-पुलिस व्यक्ति को निर्देश केवल वास्तविक तात्कालिकता और पुलिस की वास्तविक अनुपलब्धता के आधार पर ही दिया जाना चाहिए, मात्र सुविधा के लिए नहीं। न्यायिक टिप्पणियों ने यह भी रेखांकित किया है कि इस प्रकार अधिकृत कोई निजी/गैर-पुलिस व्यक्ति उस विशिष्ट वारंट के निष्पादन में पुलिस अधिकारी के समान कानूनी सुरक्षा और दायित्व का लाभ उठाता है, परंतु यह शक्ति संयमपूर्वक प्रयोग हेतु है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कहना गलत है कि पुलिस व्यस्त हो तो किसी भी अनियंत्रित/यादृच्छिक व्यक्ति को गिरफ्तारी वारंट दे दिया जा सकता है।

    तथ्य: कानून वास्तविक तात्कालिकता और पुलिस की सच्ची अनुपलब्धता की मांग करता है — न्यायालयों ने इसे एक संकीर्ण अपवाद माना है, न कि नियमित अभ्यास।

  • मिथक: यदि वारंट में अनेक पुलिस अधिकारियों के नाम हैं, तो व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए उन सबका एक साथ मौजूद होना आवश्यक है — यह कथन गलत है।

    तथ्य: Section 74(2) के अनुसार, नामित अधिकारियों या व्यक्तियों में से कोई एक या एक से अधिक, अकेले भी वारंट का निष्पादन कर सकते हैं।