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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 42

Protection of members of Armed Forces from arrest

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान उपनिवेशकाल से चली आ रही एक दीर्घकालीन सुरक्षा (मूलतः दण्ड प्रक्रिया संहिता में) को आगे बढ़ाता है, जिसका उद्देश्य सैनिकों और अन्य सरकारी बलों को कानून-व्यवस्था लागू करते समय या आधिकारिक आदेशों का पालन करते हुए—जैसे दंगों, विरोध-प्रदर्शनों या सैन्य अभियानों के दौरान—की गई कार्रवाइयों पर गिरफ़्तारी या उत्पीड़न से बचाना है। मंशा यह है कि स्थानीय पुलिस या निजी शिकायतकर्ता गिरफ़्तारी को डराने-धमकाने या विधिसम्मत कर्तव्यों में बाधा डालने के औज़ार के रूप में न प्रयोग करें, जबकि जवाबदेही बनी रहती है क्योंकि अभियोजन या गिरफ़्तारी आगे बढ़ाने से पहले स्वीकृति (sanction) की प्रक्रिया आवश्यक होती है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह अनुभाग यह नहीं कहता कि सैनिकों को कभी गिरफ्तार या दंडित ही नहीं किया जा सकता।

    तथ्य: यह प्रावधान केवल तब तक गिरफ़्तारी को टालता है जब तक सरकार सहमति न दे—यह जाँच, अभियोजन या सिद्ध होने पर दंड को नहीं रोकता।

  • मिथक: यह सुरक्षा सैनिक के हर काम पर, ड्यूटी पर हो या ड्यूटी के बाहर, सब पर लागू होती है।

    तथ्य: यह केवल उन कार्यों पर लागू है जो आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए हों या ऐसा किए जाने का दावा हो—न कि निजी या असंबंधित आचरण पर।