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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 43

Arrest how made

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान पुराने दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 46 से आया है, जिसने गिरफ़्तारी के शारीरिक तरीक़े पर दीर्घकालीन कॉमन-लॉ (common law) नियमों को संहिताबद्ध किया था। इसका उद्देश्य दो प्रतिस्पर्धी आवश्यकताओं में संतुलन बनाना है: पुलिस को व्यावहारिक अधिकार देना ताकि वे विरोध करने वाले संदिग्ध को सचमुच हिरासत में ले सकें, साथ ही मनमाने बल, अपमान या हिरासत-जनित हिंसा पर रोक लगाना। महिलाओं की गिरफ़्तारी के नियम और रात में गिरफ़्तारी पर रोक समय के साथ इसलिए जोड़ी गईं क्योंकि पुलिस हिरासत में महिलाओं की गरिमा व सुरक्षा को लेकर चिंताएँ उठीं; और हथकड़ी संबंधी प्रावधान न्यायालयों की इस चिंता को दर्शाता है कि विचाराधीन या अभियुक्त व्यक्तियों को अनावश्यक रूप से नियमित तौर पर हथकड़ी लगाई जा रही थी।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालय लगातार मानते आए हैं कि गिरफ़्तारी वास्तविक और न्यायसंगत उद्देश्य से होनी चाहिए, न कि यांत्रिक या दमनकारी ढंग से — Joginder Kumar v. State of U.P. (1994) में सर्वोच्च न्यायालय ने रेखांकित किया कि गिरफ़्तारी व्यक्ति की गरिमा और स्वतंत्रता को प्रभावित करती है और केवल अधिकार होने भर से स्वतः नहीं होनी चाहिए। हथकड़ी के विषय में, Prem Shankar Shukla v. Delhi Administration (1980) तथा बाद में Citizens for Democracy v. State of Assam (1995) ने कहा कि बिना विशेष औचित्य के नियमित हथकड़ी लगाना अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है, और कारणों का लेखा-जोखा आवश्यक है — यह सिद्धांत अब उप-धारा (3) में गंभीर अपराधों की संहिताबद्ध सूची में परिलक्षित है। गिरफ़्तारी प्रक्रिया और हिरासत संबंधी सुरक्षा पर D.K. Basu v. State of West Bengal (1997) में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश भी आज इन प्रावधानों की न्यायालयों द्वारा की जाने वाली व्याख्या और प्रवर्तन को मार्गदर्शित करते हैं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: पुलिस किसी भी गिरफ़्तार व्यक्ति को हथकड़ी लगा सकती है।

    तथ्य: हथकड़ी केवल विशिष्ट गंभीर अपराधों में या पुनरावृत्ति/फ़रार-जोखिम वाले अभियुक्तों पर, अपराध के स्वरूप और गंभीरता के आधार पर लगाई जा सकती है — हर गिरफ़्तारी में इसे सामान्य तौर पर नहीं लगाया जा सकता।

  • मिथक: महिलाओं को रात में कभी भी गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता।

    तथ्य: महिलाओं को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले केवल असाधारण परिस्थितियों में ही, और केवल तब गिरफ़्तार किया जा सकता है जब कोई महिला अधिकारी पूर्व-लिखित मजिस्ट्रेटीय अनुमति ले आए।

  • मिथक: पुलिस किसी प्रतिरोध करने वाले व्यक्ति को गिरफ़्तार करने हेतु किसी भी स्तर का बल प्रयोग कर सकती है।

    तथ्य: पुलिस केवल उतने ही साधन/बल का प्रयोग कर सकती है जितना गिरफ़्तारी कराने के लिए आवश्यक हो, और कभी भी मृत्यु का कारण नहीं बन सकती जब तक कि उस व्यक्ति पर ऐसे अपराध का आरोप न हो जो मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय है।