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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 39

Arrest on refusal to give name and residence

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

असंज्ञेय अपराध मामूली होते हैं और सामान्यतः इनके लिए पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार नहीं कर सकती। पर यदि अपराधी अपनी पहचान बताने से इंकार करे, तो पुलिस बाद में उसके विरुद्ध कार्यवाही नहीं कर पाएगी—समन या नोटिस के लिए नाम-पता चाहिए। यह प्रावधान (पुराने आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 42 से अवतरित) एक संकीर्ण, उद्देश्य-सीमित गिरफ़्तारी शक्ति देता है: दंड के लिए नहीं, केवल पहचान स्थापित करने के लिए; इसके बाद व्यक्ति को शीघ्र ही बांड पर छोड़ना अनिवार्य है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने लगातार माना है कि यह गिरफ़्तारी शक्ति केवल पहचान सुनिश्चित करने तक कड़ी सीमित है और इसे असंज्ञेय अपराध की सामान्य हिरासत या जाँच के परोक्ष साधन के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता। नाम और पता सत्यापित हो जाने पर आगे की निरोध अवैध है, और पुलिस को विधि अनुसार व्यक्ति को बांड पर छोड़ना होगा। 24 घंटे की सीमा संविधान में 24 घंटे से अधिक बिना मजिस्ट्रेटी पर्यवेक्षण के निरुद्ध न रखने के संरक्षण (भारत के संविधान का अनुच्छेद 22(2)) से भी सामंजस्य रखती है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा पुलिस को किसी भी छोटे अपराध के लिए अनिश्चितकाल तक गिरफ़्तार करके रखने की अनुमति देती है।

    तथ्य: गिरफ़्तारी का उद्देश्य केवल पहचान जानना है, और पहचान पुष्ट होते ही व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर बांड पर छोड़ना होगा, अन्यथा उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।

  • मिथक: पुलिस इस शक्ति का उपयोग तब भी कर सकती है जब व्यक्ति ने अपना सही नाम और पता बता दिया हो।

    तथ्य: यह शक्ति तभी लागू होती है जब व्यक्ति अपना नाम/पता बताने से मना करे या अधिकारी को उचित कारण से लगे कि दिए गए विवरण झूठे हैं।