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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 299

Statements of accused not to be used

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

दया-याचना में दोषारोपित से अपेक्षा होती है कि वह स्पष्ट रहे और ऐसे तथ्य व परिस्थितियाँ स्वीकार करे जो अन्यथा आत्म-अपराधीकरण का कारण बन सकती हैं। इस संरक्षण के बिना कोई भी दया-याचना के लिए आवेदन करने का जोखिम नहीं उठाएगा, क्योंकि आशंका होगी कि यदि बातचीत विफल हुई तो उसकी अपनी स्वीकृतियाँ बाद में उसके विरुद्ध प्रयोग हो सकती हैं। यह गोपनीयता-नियम ईमानदार भागीदारी को प्रोत्साहित करता है और आत्म-अपराध के विरुद्ध संवैधानिक सिद्धांत (right against self-incrimination) की रक्षा करता है।