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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 103

Persons in charge of closed place to allow search

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान एक दीर्घकालिक सुरक्षा को आगे बढ़ाता है (पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 100, जिसकी जड़ें उन्नीसवीं सदी के संहिताओं में हैं) जिसका उद्देश्य पुलिस द्वारा गुप्त या मनमानी तलाशी को रोकना है। स्वतंत्र गवाहों की अनिवार्यता, प्रलेखित जब्ती सूचियाँ और अधिवासी की उपस्थिति के माध्यम से, कानून झूठे सबूत रोपने, शक्ति के दुरुपयोग, और तलाशी के दौरान वास्तव में क्या मिला इस पर विवादों को रोकने की कोशिश करता है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

समकक्ष दंड प्रक्रिया संहिता धारा 100 के अंतर्गत, न्यायालयों ने माना है कि स्वतंत्र गवाह न बुलाने या तलाशी प्रक्रिया में त्रुटि मात्र से जब्ती स्वतः अमान्य नहीं हो जाती, पर उसकी साक्ष्यमूल्य में गंभीर कमी आती है और कपट की आशंका जन्म लेती है। न्यायालयों ने यह भी रेखांकित किया है कि महिला की तलाशी केवल महिला द्वारा ही होना गरिमा की अनिवार्य सुरक्षा है, और अधिवासियों को तलाशी देखने तथा जब्ती सूची पाने का वास्तविक अधिकार है, मात्र औपचारिकता नहीं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: पुलिस किसी भी व्यक्ति की मौके पर बिना किसी गवाह के तलाशी ले सकती है।

    तथ्य: प्रक्रिया को पारदर्शी रखने के लिए कानून स्वतंत्र गवाहों से तलाशी देखने और जब्त वस्तुओं की सूची पर हस्ताक्षर करवाने की मांग करता है।

  • मिथक: तलाशी के गवाहों को बाद में निश्चित रूप से अदालत में गवाही देनी ही पड़ेगी।

    तथ्य: कानून कहता है कि गवाहों को अदालत में उपस्थित होना आवश्यक नहीं है, जब तक कि उन्हें विशेष रूप से अदालत द्वारा तलब न किया जाए।

  • मिथक: किसी महिला की तलाशी कोई भी मौजूद पुलिस अधिकारी ले सकता है।

    तथ्य: कानून विशेष रूप से निर्धारित करता है कि महिला की तलाशी केवल किसी महिला द्वारा ही ली जाए, और शालीनता का कड़ाई से ध्यान रखा जाए।