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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 79

Word, gesture or act intended to insult modesty of a woman

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान पुराने भारतीय दंड संहिता (1860) की धारा 509 से आया है—औपनिवेशिक दौर का वह कानून जो महिलाओं के विरुद्ध गैर-शारीरिक उत्पीड़न जैसे फूहड़ टिप्पणियाँ, अश्लील इशारे, वस्तुओं का अशोभनीय प्रदर्शन, या तथाकथित ‘ईव-टीज़िंग’—जिन्हें शारीरिक आक्रमण से कम माना जाता था—को दंडित करने हेतु बनाया गया था। ‘निजता में दखल’ वाला वाक्यांश दण्ड प्रक्रिया में 2012 दिल्ली सामूहिक बलात्कार प्रकरण के बाद सार्वजनिक आक्रोश के पश्चात आपराधिक क़ानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 द्वारा जोड़ा गया, ताकि झाँकना, पीछा-करने जैसे निगरानी व्यवहार, या किसी महिला की निजी घड़ियों में जासूसी जैसे कृत्य भी आ जाएँ। भारतीय न्याय संहिता, 2023 ने इस प्रावधान को मोटे तौर पर अपरिवर्तित रखते हुए धारा 79 के रूप में आगे बढ़ाया है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

पूर्ववर्ती आईपीसी धारा 509 के तहत न्यायालयों ने यह सिद्धांत विकसित किया कि ‘लज्जा’ स्त्रीत्व का अंतर्निहित गुण है, जो उसकी आयु, आचरण या वस्त्र पर निर्भर नहीं करता। State of Punjab v. Major Singh (1966) में उच्चतम न्यायालय ने माना कि बहुत छोटी बालिका की लज्जा का भी अपमान हो सकता है। Rupan Deol Bajaj v. Union of India (1994) में न्यायालय ने कहा कि अपराध सिद्ध होने हेतु कृत्य का कामुक होना आवश्यक नहीं—यदि किसी महिला को नीचा दिखाने के इरादे से किया गया अपमानजनक शारीरिक इशारा (उस मामले में थप्पड़) हो, तो वह भी उसकी लज्जा का अपमान ठहर सकता है, बशर्ते अपमान का इरादा मौजूद हो। न्यायालयों ने लगातार रेखांकित किया है कि अभियुक्त का इरादा और महिला की गरिमा-बोध पर प्रभाव इस अपराध की स्थापना के केन्द्रीय तत्व हैं, और यही व्याख्यात्मक सिद्धांत भारतीय न्याय संहिता की समरूप भाषा वाली धारा 79 के मार्गदर्शक बने रहेंगे।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह आवश्यक नहीं कि शब्द या इशारे यौन-स्पष्ट हों, तभी अपराध बनता है।

    तथ्य: न्यायालयों ने माना है कि किसी महिला की गरिमा का अपमान करने के इरादे से किया गया कोई भी कृत्य—भले ही वह गैर-यौन लेकिन हीन दिखाने वाला इशारा हो—यदि उसकी लज्जा का अपमान करने की मंशा मौजूद है, तो अपराध के तहत आ सकता है।

  • मिथक: इस अपराध के लिए शारीरिक संपर्क आवश्यक है।

    तथ्य: स्पर्श आवश्यक नहीं है। शब्द, ध्वनियाँ, इशारे, कोई वस्तु दिखाना, या मात्र निजता में दखल देना—यदि लज्जा का अपमान करने के इरादे से किया गया हो—पर्याप्त है।

  • मिथक: यह धारा केवल अजनबियों से वयस्क महिलाओं की ही रक्षा करती है।

    तथ्य: न्यायालयों ने माना है कि महिला की लज्जा—जिसमें छोटी बच्ची की भी लज्जा शामिल है—का अपमान संबंधों की प्रकृति या महिला की आयु की परवाह किए बिना हो सकता है।