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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 78

Stalking

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 354D के रूप में सबसे पहले आपराधिक विधि (संशोधन) अधिनियम, 2013 द्वारा जोड़ा गया था, जो 2012 दिल्ली सामूहिक बलात्कार कांड और न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा समिति की सिफारिशों के बाद पारित हुआ। समिति ने रेखांकित किया था कि बार‑बार किया जाने वाला अवांछित पीछा—शारीरिक हो या ऑनलाइन—अक्सर गंभीर हिंसा में बदल जाता है और इसे अस्पष्ट छेड़छाड़ संबंधी धाराओं पर छोड़ने के बजाय एक पृथक अपराध के रूप में दंडनीय बनाना आवश्यक है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 ने इस प्रावधान को लगभग ज्यों‑का‑त्यों धारा 78 के रूप में आगे बढ़ाया है, जिसमें शारीरिक पीछा करने के साथ‑साथ डिजिटल निगरानी और साइबर स्टॉकिंग की नई वास्तविकता को भी मान्यता दी गई है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने दूसरे पहलू—ऑनलाइन गतिविधि की निगरानी—को व्यापक रूप में पढ़ते हुए साइबर स्टॉकिंग को समाहित माना है, जिसमें नकली प्रोफ़ाइल बनाना या बिना सहमति किसी के डिजिटल पदचिह्नों का पता लगाना शामिल है; Kalandi Charan Lenka v. State of Odisha (Orissa High Court, 2017) में अदालत ने माना कि नकली खातों और परिवर्तित छवियों के जरिए किया गया लगातार ऑनलाइन उत्पीड़न, भले ही BNS के तहत इस पर व्यापक वाद न हुए हों, इस स्टॉकिंग प्रावधान की भावना के भीतर आता है। न्यायालयों ने यह भी रेखांकित किया है कि अपवादों (पुलिस कर्तव्य, कानूनी अनुपालन, या युक्तिसंगत औचित्य) को सिद्ध करने का भार अभियुक्त पर है, क्योंकि यह प्रावधान अभियोजन के प्रारंभिक भार का हिस्सा न होकर उपबंध (प्रोवाइज़ो) के रूप में संरचित है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: स्टॉकिंग का अर्थ केवल किसी के पीछे‑पीछे शारीरिक रूप से घूमना ही होता है।

    तथ्य: कानून डिजिटल स्टॉकिंग को भी समेटता है—किसी की इंटरनेट उपयोग, ईमेल या ऑनलाइन गतिविधि की चुपचाप निगरानी करना भी स्टॉकिंग माना जाता है।

  • मिथक: यदि पुरुष कहे कि उसका ‘अच्छा इरादा’ था या वह केवल संबंध बनाना चाहता था, तो यह अपराध नहीं है।

    तथ्य: संबंध बनाने का इरादा मायने नहीं रखता; मायने यह रखता है कि क्या महिला ने स्पष्ट रूप से अनिच्छा दिखाई और क्या वह इसके बावजूद जारी रहा।

  • मिथक: केवल अजनबियों पर ही स्टॉकिंग का आरोप लग सकता है।

    तथ्य: यह कानून पूर्व संबंध की परवाह किए बिना लागू होता है—मित्र, सहकर्मी या पूर्व साथी—यदि आचरण परिभाषा में आता है तो उन सभी पर आरोप लग सकता है।