The Constitution of India
अनुच्छेद 307
अनुच्छेद 301 से अनुच्छेद 304 के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए प्राधिकारी की नियुक्ति
सत्यापन प्रतीक्षित
अनुच्छेद 301 से अनुच्छेद 304 के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए प्राधिकारी की नियुक्ति — संसद् विधि द्वारा, ऐसे प्राधिकारी की नियुक्ति कर सकेगी जो वह अनुच्छेद 301, अनुच्छेद 302, अनुच्छेद 303 और अनुच्छेद 304 के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए समुचित समझे और इस प्रकार नियुक्त प्राधिकारी को ऐसी शक्तियां प्रदान कर सकेगी और ऐसे कर्तव्य सौंप सकेगी जो वह आवश्यक समझे । संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं अध्याय 1 - सेवाएं
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
अनुच्छेद 301 से 304 तक यह व्यापक आश्वासन देते हैं कि व्यापार, वाणिज्य और वस्तुओं व लोगों की आवाजाही पूरे भारत में सामान्यतः स्वतंत्र रहेगी, जबकि संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा कुछ सीमित प्रतिबंधों की अनुमति है। संविधान निर्माताओं ने आशंका जताई थी कि केवल यह स्वतंत्रता लिख देना पर्याप्त नहीं होगा—इस पर सक्रिय निगरानी, समन्वय या विवाद निपटारा करने वाले किसी निकाय की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी दूरदर्शिता से अनुच्छेद 307 जोड़ा गया, ताकि संसद को यह विकल्प रहे कि वह एक समर्पित निकाय (अन्य संघीय व्यवस्थाओं में अंतर-राज्यीय व्यापार आयोगों के समान) स्थापित कर सके जो इस स्वतंत्रता की देखरेख और कार्यान्वयन करे—परंतु ऐसा निकाय अनिवार्य नहीं बनाया गया।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कहना गलत है कि अनुच्छेद 307 ने भारत में कोई वास्तविक व्यापार प्राधिकरण बना दिया है।
तथ्य: इस अनुच्छेद के तहत संसद ने अब तक ऐसा कोई प्राधिकरण स्थापित नहीं किया है; यह कागज़ पर मौजूद, पर अप्रयुक्त शक्ति बनी हुई है।
मिथक: यह कहना गलत है कि अनुच्छेद 307 स्वयं राज्यों के बीच मुक्त व्यापार की गारंटी देता है।
तथ्य: वास्तविक रूप से व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता की गारंटी अनुच्छेद 301–304 देते हैं; अनुच्छेद 307 केवल संसद को ऐसा निकाय बनाने का अधिकार देता है जो उन गारंटियों का कार्यान्वयन कराने में सहायक हो।