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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 308

निर्वचन

निर्वचन — इस भाग में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, “राज्य” पद 1के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर राज्य नहीं है ।]

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

जम्मू और कश्मीर ने 1947 में विशेष शर्तों पर भारत में विलय किया, और अनुच्छेद 370 ने उसे संघ के साथ एक विशिष्ट संवैधानिक संबंध दिया, जिसमें उसकी अपनी अलग संविधान तथा सिविल सेवाओं के लिए पृथक प्रशासनिक व्यवस्थाएँ शामिल थीं। अनुच्छेद 308 एक तकनीकी, परिभाषात्मक प्रावधान था जो स्पष्ट करता था कि भाग XIV के सामान्य नियम (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और अखिल-भारतीय सेवाओं के बारे में) साधारण अर्थ में ‘राज्यों’ पर लागू होते हैं, पर स्वतः जम्मू और कश्मीर पर नहीं, क्योंकि उसके विशेष दर्जे के तहत उसकी अपनी अलग सेवा-नियमावली थी।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने अनुच्छेद 308 पर स्वतंत्र रूप से अधिक मुकदमेबाज़ी नहीं की; यह अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति से जुड़ा एक पृष्ठभूमि परिभाषात्मक खंड के रूप में कार्य करता रहा। 2019 में संसद की कार्रवाइयों और 2023 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय In Re: Article 370 के बाद जम्मू और कश्मीर की संवैधानिक स्थिति बदलकर उसका पुनर्गठन संघ शासित प्रदेशों में हुआ। इससे अनुच्छेद 308 का व्यावहारिक संचालन मुख्यतः ऐतिहासिक हो गया है, यद्यपि उसका पाठ संविधान में बना हुआ है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: अनुच्छेद 308 जम्मू और कश्मीर को स्थायी, अपरिवर्तनीय विशेष दर्जा देता है।

    तथ्य: अनुच्छेद 308 तो केवल भाग XIV में शब्द-प्रयोग से जुड़ा एक परिभाषात्मक खंड है; वास्तविक विशेष दर्जा अनुच्छेद 370 से आया था, जिसे 2019 में संसद ने बड़े पैमाने पर बदला और 2023 में सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ संशोधनों के साथ बरक़रार रखा।

  • मिथक: अनुच्छेद 308 पूरे संविधान से जम्मू और कश्मीर को बाहर कर देता है।

    तथ्य: यह केवल भाग XIV (संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ) के भीतर ‘राज्य’ शब्द की समझ को प्रभावित करता है, न कि पूरे संविधान को।