Indian Penal Code, 1860
धारा 339
repealedWrongful restraint
Whoever voluntarily obstructs any person so as to prevent that person from proceeding in any direction in which that person has a right to proceed, is said wrongfully to restrain that person.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
आवागमन की व्यक्तिगत स्वतंत्रता कानून द्वारा संरक्षित एक मूल मूल्य है। यह धारा अपराध का अर्थ स्पष्ट करती है ताकि अगली धारा उसकी सजा निर्धारित कर सके; यह जानबूझकर किसी के मार्ग के थोड़े समय या आंशिक अवरोधन को भी शामिल करती है, न कि केवल पूर्ण बंदीकरण को।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालती व्याख्या के अनुसार, अनुचित अवरोध तब बनता है जब व्यक्ति की उस विशेष दिशा में गति रोकी जाए जहाँ जाने का उसे अधिकार है; और यदि व्यक्ति के पास आगे बढ़ने का कोई अन्य युक्तिसंगत मार्ग उपलब्ध हो, तो यह केवल अवरोध माना जाएगा, न कि पूर्ण बंदीकरण, जो कि सर्वथा घेराबंदी है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: अवरोध का अर्थ है पूर्णतः फँस जाना और बाहर निकलने का कोई मार्ग न होना।
तथ्य: अनुचित अवरोध के लिए केवल उस एक दिशा का रोका जाना पर्याप्त है जिसमें जाने का व्यक्ति को अधिकार हो; यदि वह किसी और राह से जा सकता है, तो यह अवरोध है, न कि पूर्ण बंदीकरण।