Indian Penal Code, 1860
धारा 304A
repealedCausing death by negligence
Whoever causes the death of any person by doing any rash or negligent act not amounting to culpable homicide shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह धारा लापरवाही से हुई आकस्मिक मृत्यु के मामलों को कवर करती है—जैसे सड़क दुर्घटनाएँ, चिकित्सीय लापरवाही, या औद्योगिक हादसे—जहाँ मृत्यु का इरादा या संभावित मृत्यु का ज्ञान नहीं था; इस प्रकार यह उन्हें अधिक गंभीर मानव वध अपराधों से अलग करती है। सड़क दुर्घटनाओं तथा लापरवाही-जन्य मृत्यु के मामलों में, जहाँ किसी को जान-बूझकर हानि पहुँचाने का इरादा नहीं था, यह सबसे अधिक लागू होने वाली धाराओं में से एक है। भारतीय दंड संहिता के स्थान पर आई भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) में यह अपराध पुनर्संख्या के साथ जारी है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि यह धारा तभी लागू होती है जब मृत्यु का कारण केवल उतावला या लापरवाह आचरण हो और मृत्यु होने की न तो मंशा हो न ही यह ज्ञान कि मृत्यु संभावित परिणाम है; क्योंकि इनमें से कोई तत्व हो तो मामला दंडनीय मानव वध (culpable homicide) या हत्या में आएगा। चिकित्सकों से जुड़े मामलों में उच्चतम न्यायालय ने सावधान किया है कि केवल पेशेवर निर्णय में त्रुटि भर के लिए डॉक्टर पर इस धारा के तहत अभियोजन न किया जाए; आपराधिक लापरवाही सिद्ध करने हेतु दीवानी दायित्व की तुलना में कहीं अधिक उच्च स्तर की असावधानी या लापरवाही अपेक्षित है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: किसी भी दुर्घटना से हुई मृत्यु, जिसमें ईमानदार चिकित्सीय भूल भी शामिल हो, अपने-आप इस धारा के तहत दंडनीय होती है।
तथ्य: न्यायालय उच्च स्तर की उतावलापन या लापरवाही की माँग करते हैं—सिर्फ़ निर्णय-त्रुटि या सामान्य असावधानी पर्याप्त नहीं—और विशेष रूप से अच्छे विश्वास में किए गए पेशेवर कृत्यों के लिए डॉक्टरों पर इस धारा में अभियोजन चलाने के विरुद्ध सावधान किया है।