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सं Samvidhan

Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023

धारा 34

Previous judgments relevant to bar a second suit or trial

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह नियम उस क़ानूनी सिद्धांत का समर्थन करता है कि एक ही विवाद को, सक्षम न्यायालय द्वारा अंतिम रूप से तय हो जाने के बाद, बार‑बार मुक़दमेबाज़ी में नहीं लाया जाना चाहिए (रेस जुडिकाटा [res judicata] और डबल जियोपर्डी [double jeopardy] जैसे अवधारणाओं से संबंधित)। यह सुनिश्चित करता है कि जब कोई कहे ‘यह मामला पहले ही निपट चुका है’ या ‘इस व्यक्ति पर पहले ही मुक़दमा चल चुका है’, तो वह पहले का निर्णय स्वयं उस दलील के समर्थन में ग्राह्य साक्ष्य बन जाए, ताकि न्यायालय पहले के अंतिम निर्णयों को कुशलता से मान्यता देकर निपटे हुए मामलों को दोबारा न सुने।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

यह धारा पुराने Indian Evidence Act, 1872 की धारा 40 की भाषा को बड़े पैमाने पर यथावत् आगे बढ़ाती है। भारतीय न्यायालयों ने परंपरागत रूप से इसे दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 11 (रेस जुडिकाटा [res judicata]) और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 300 (ऑट्रफ़्वा एक्विट/कन्विक्ट [autrefois acquit/convict], डबल जियोपर्डी से सुरक्षा) जैसे प्रक्रियात्मक निषेधों के साथ पढ़ा है। न्यायालयों ने पहले दिए गए निर्णय के अस्तित्व को एक ऐसे तथ्य के रूप में माना है जिसे सिद्ध करके यह दर्शाया जा सकता है कि दूसरा वाद या विचारण क़ानूनी रूप से वर्जित है, और इसके लिए पहले के निर्णय के गुण‑दोष को फिर से खोलने की आवश्यकता नहीं होती।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा स्वयं यह तय कर देती है कि क्या कोई मामला पहले के निर्णय से बाधित है।

    तथ्य: यह धारा केवल उस पहले के निर्णय के अस्तित्व को साक्ष्य के रूप में प्रासंगिक बनाती है; वास्तव में नया मामला क़ानूनी रूप से बाधित है या नहीं, यह अन्य क़ानूनों पर निर्भर करता है, जैसे दीवानी प्रक्रिया संहिता में रेस जुडिकाटा [res judicata] के नियम या आपराधिक प्रक्रिया में डबल जियोपर्डी [double jeopardy] से सुरक्षा।

  • मिथक: कोई भी पुराना निर्णय अपने‑आप नया मामला दायर होने से रोक देता है।

    तथ्य: केवल वही निर्णय जो ‘क़ानून द्वारा’ संज्ञान को रोकता है (अर्थात् जो ऐसे निषेध के क़ानूनी शर्तों—जैसे वही पक्ष और वही मुद्दा—को संतुष्ट करता है) ऐसा प्रभाव उत्पन्न करता है; हर पिछला निर्णय अपने‑आप यह परिणाम नहीं देता।